सिकंदराराऊ (हाथरस)। कस्बा के हुरमतगंज में मंगलवार की रात्रि कंप्यूटर सेंटर संचालकों से मारपीट के बाद हुए बवाल के मामले में बुधवार को मुकदमा दर्ज करा दिया। कंप्यूटर सेंटर संचालक ने सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है, जबकि 14 नामजदों के खिलाफ पुलिस ने खुद रिपोर्ट दर्ज की है। पथराव और फायरिंग में दो दारोगा और एक सिपाही भी घायल हुए हैं। इन तीनों का डॉक्टरी परीक्षण कराया गया है। प्रभावित इलाकों में बुधवार को दिन भर तनाव भरी खामोशी पसरी रही। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए एहतियातन पुलिस बल भी तैनात रहा। हालांकि अभी तक पुलिस इस मामले में किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकी है।
बता दें कि मोहल्ला हुरमतगंज में कंप्यूटर कोर्स के ऑनलाइन परीक्षा में नकल कराने से इंकार करने पर कुछ लोगों ने कंप्यूटर सेंटर संचालक भाइयों संजय, अजय और राहुल के साथ मारपीट की थी। मारपीट का आरोप मोहल्ला नौरंगाबाद निवासी सरफराज, कासिम, नवेद, शाहिद, वसीम और रफीक आदि पर लगा है। इसके बाद बढ़े विवाद में दोनों समुदायों के लोगों में जमकर पथराव, मारपीट हुई थी। कोतवाली पुलिस जब मौके पर पहुंची तो उसे भी नहीं बख्शा गया। देर रात पास के ही मोहल्ला नौरंगाबाद में एक युवक को उठाने पर सैकड़ों महिलाओं ने एसपी डॉ. अजयपाल शर्मा, एएसपी राममूरत यादव, एसडीएम एनपी पांडेय और सीओ डीके बालियान आदि अफसरों की गाड़ियां घेर ली थीं। महिलाएं एसपी की गाड़ी के आगे लेट गई थीं। जमकर हाय-तौबा मचाई। भीड़ पुलिस की गाड़ियों तक पर चढ़ गई। भीड़ के सामने पूरा पुलिस का अमला बुरी तरह लाचार नजर आया। मोहल्ले के लोग जबरन संदिग्ध युवक को पुलिस से छुड़ाकर ले गए थे। जैसे-तैसे एसपी समेत अन्य पुलिसकर्मियों ने अपनी जान बचाई थी तथा कोतवाली पर पहुंचे। बताते हैं कि वहां पुलिस पर भयंकर पथराव और फायरिंग की गई, जिससे भगदड़ मच गई। पथराव में पुलिस के दारोगा संजय सिंह, इजहार अहमद और सिपाही शीलेश यादव घायल हो गए। घायलों का रात में ही चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया। कोतवाल राजेश्वर प्रसाद त्यागी ने बताया कि इस मामले में 14 नामजदों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है, उनमें सरफराज, रफीक, वसीम, कासिम, नवेद, राशिद, दानिश, शाहनवाज, रईस, असलम, वलीम, नजीम और मुनन सहित 35-40 अज्ञात लोग शामिल हैं। बुधवार को मोहल्ला नौरंगाबाद के बाहर पुलिस बल पूरे दिन तैनात रहा।
नौरंगाबाद में फिर दिखी पुलिस की लाचारी
सिकंदराराऊ। हुरमतगंज में हुए सांप्रदायिक झगड़े के बाद एसपी की अगुआई में दबिश देने पहुंची पुलिस टीम की जिस तरह प्रदर्शनकारियों ने घेराबंदी की और उन्हें उल्टे पांव लौटने पर मजबूर कर दिया, उससे यह सवाल खड़ा हो गया कि क्या वाकई जिले की पुलिस इस तरह के गंभीर हालात से निपटने में सक्षम है। आखिर बड़े अफसरों की मौजूदगी में विरोध प्रदर्शन के बीच पुलिस फोर्स के पांव कैसे उखड़े। क्या उनकी रणनीति कमजोर थी या फिर जानबूझकर पुलिस अफसरों ने कदम पीछे खींच लिए। जो भी, लेकिन नौरंगाबाद में पुलिस पर हमले ने उसकी लाचारी को एक बार फिर जग जाहिर कर दिया है और यह जता दिया है कि ऐसे हालात काबू करना जिले की पुलिस के वश की बात नहीं है।