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कॉल सेंटर संचालक पर मुकदमा दर्ज, गिरफ्तार

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क्राइम डेस्क, अमर उजाला, हाथरस।
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सदर कोतवाली पुलिस ने मुंबई के युवक से हजारों की ठगी करने के आरोपी कॉल सेंटर ओम शक्ति टेली शॉपिंग सेंटर के संचालक अभिषेक उपाध्याय निवासी बालापट्टी के विरुद्ध धोखाधड़ी के आरोप में मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है।

मुंबई के अरगीपाड़ा निवासी शेख के पास दो महीने पहले कॉल आई थी। कॉल करने वाले ने खुद को ओम शक्ति टेलीशॉपिंग सेंटर से बताया तथा लुभावना ऑफर दिया। छह हजार रुपये में स्मार्ट फोन के साथ प्रतिष्ठित कंपनी की किट देने का वायदा किया गया। ऑफर सही लगने पर शेख ने ऑफर बुक करा दी।
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पैसे देकर पार्सल छुड़ाया, लेकिन पार्सल खोला तो उसके होश उड़ गए। पार्सल में रद्दी के अलावा कुछ नहीं था। शेख ने जनसुनवाई पोर्टल पर मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए शिकायत की थी। मंगलवार को एसपी घुले सुशील ने पुलिस को इस मामले में कार्रवाई के आदेश दिए थे।

पुलिस ने पुराने प्रकाश टॉकीज के पीछे बालापट्टी में कॉल सेंटर पर छापा मारकर कई मोबाइल फोन और संदिग्ध सामग्री बरामद की थी। हालांकि संचालक के गोदाम तक पुलिस नहीं पहुंच सकी। संचालक को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और बुधवार को उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

इस मामले में पुलिस की कार्रवाई सवालों के घेरे में रही है। आरोपी के विरुद्ध आईटी एक्ट की धारा नहीं जोड़ी गई है। जबकि अभी तक कॉल सेंटर से संबंधित फर्जीवाड़े के सभी मुकदमों में आईटी एक्ट की धारा जोड़ी जाती रही है। मालूम हो कि आईटी एक्ट की धारा जोड़े जाने पर मुकदमे की विवेचना सीओ स्तर के अधिकारी को करनी होती है।

आईटी एक्ट न जोड़े जाने से इस मामले की विवेचना अब चौकी इंचार्ज कर सकेंगे। कार्यवाहक थानाध्यक्ष मनोज शर्मा ने बताया कि आरोपी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर उसे कोर्ट में पेश किया गया जहां से उसे जेल भेजा गया है। आरोपी के विरुद्ध नियमानुसार उचित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। विवेचना के दौरान नई धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं।
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जमानत मिलने पर फिर चल पड़ता है गोरखधंधा
हाथरस। पुलिस की कार्रवाई के बावजूद शहर में कॉल सेंटरों का फर्जीवाड़ा रुकने का नाम नहीं ले रहा। पुलिस शिकायत का अभाव बताकर कॉल सेंटरों पर कार्रवाई नहीं करती। आला अधिकारियों के निर्देश या जनसुनवाई पोर्टल आदि पर शिकायत होने के बाद कॉल सेंटरों पर छापेमारी की जाती है। पकड़े जाने के कुछ समय बाद कॉल सेंटर संचालक जमानत मिलने पर बाहर आ जाते हैं और दोबारा इसी गोरखधंधे में जुट जाते हैं। ऐसे कई संचालक हैं जो जेल से बाहर आने के बाद धड़ल्ले से कॉल सेंटर का काला कारोबार कर रहे हैं। इनमें से कुछ तो कई बार जेल की हवा खा चुके हैं। अधिकारी कॉल सेंटरों पर प्रभावी रोकथाम की कोशिश नहीं कर रहे हैं।
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