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कई घटनाओं और दुर्घटनाओं से इस साल थर्रा गया जिला

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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हाथरस। इस साल कई बड़ी घटनाओं और हादसों से जिला थर्रा गया। कई बड़े हादसे हुए वहीं कई बार पुलिस और भीड़ के बीच भिड़ंत भी हुई। कई घटनाओं के बाद तनाव के हालात भी रहे। इन घटनाओं के बाद पैदा हुए हालात को पुलिस प्रशासन नेे बड़ी मुश्किल से नियंत्रित किया। कई बड़ी घटनाएं काफी सुर्खियों में रही। कई जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामले भी सुर्खियों में रहे।

यदि हादसों को देखे तो इस साल कई बड़े हादसे हुए। सिकंदराराऊ में हाथरस रोड पर माह फरवरी में एक टैंकर पलट गया और दुर्घटना में चार लोग मर गए। सासनी में भी 10 जून को टाटा मैक्स गाड़ी एक पेड़ से जा टकराई और छह लोग काल के गाल में समा गए। कई लोग घायल भी हो गए। इसी तरह चार नवंबर को सादाबाद में यमुना एक्सप्रेस-वे पर मिढावली में दो कारों की आमने-सामने हुई भिड़ंत में एक ही परिवार के तीन सदस्योे सहित चार लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों में फिरोजाबाद का एक कांच कारोबारी भी था।
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इसके बाद पांच दिसंबर को चंदपा में बारातियोें से लदी एक ट्रैक्टर-ट्राली जब असंतुलित होकर पलट गई तो इस हादसे में तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई और दो दर्जन से ज्यादा घायल हो गए। साल के आखिरी महीने में 15 दिसंबर को पोरा के निकट चलती कार में आग लग गई और पांच लोगों की इस दर्दनाक हादसे में मौत हो गई। कई और हादसों ने इस साल काफी परिवारों की खुशी छीन ली। यही नहीं अलीगढ़ में हाथरस रोड पर सितंबर के पहले सप्ताह में मुकुंदपुर के निकट एक हुए सड़क हादसे में जिले की कई अध्यापिकाओं की मौत हो गई थी और इससे कई दिन तक शिक्षा जगत में शोक व्याप्त रहा था।


इसी तरह कई बड़ी घटनाएं भी हुई और इन्हें लेकर तनाव भी व्याप्त रहा। वर्ष के शुरूआत में कासगंज में हुई घटना को लेकर सिकंदराराऊ में भी तनाव की स्थिति रही। इसी तरह फरवरी में हाथरस के खंदारीगढ़ी में एक युवक अमित उर्फ पिंकू की हत्या के बाद खासा बवाल हुआ। वहां तनाव व्याप्त रहा। पुलिस फोर्स भी कई दिन तक तैनात रही। मार्च के महीने में सांसद के प्रतिनिधि रहे मुकेश पौरुष की एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान हुई मौत को लेकर भी खासा बखेड़ा रहा और यह प्रकरण अभी भी सुर्खियों में है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी-एसटी एक्ट को लेकर दिए गए आदेश के चलते यहां दलित संगठनों ने सड़क पर उतर कर प्रदर्शन किया और ट्रेनें आदि रोककर जाम लगाया। विजयादशमी पर जब आरएसएस के शस्त्रपूजन कार्यक्रम में हर्ष फायरिंग में एक जनप्रतिनिधि की रायफल से एक मीडियाकर्मी घायल हो गया तो भी खासा हंगामा खड़ा हुआ।

यह मामला भी सुर्खियों में रहा। सात सितंबर को देश भर के कुली जब हाथरस जंक्शन रेलवे स्टेशन पर गुपचुप तरीके के एकत्रित हो गए और करीब पांच घंटे तक उत्तर मध्य रेलवे ट्रैक पर जाम लगा दिया तो भी हालात बेकाबू हो गए थे। तब स्थिति जैसे-तैस नियंत्रित हुई थी। इससे पहले 20 अगस्त को सहपऊ में महरारा में अंडरपास की मांग और रेलवे ला इन को बिछाने के विरोध के चलते पुलिस और ग्रामीणों भिड़ंत हुई थी और इसमें पुलिस की फायरिंग से अफरा-तफरी मची थी। मुरसान में भी अगस्त के महीने में जब एक किशोरी को लेकर एक युवक भाग गया था तो कस्बे में सांप्रदायिक तनाव व्याप्त हो गया था और पुलिस ने जैसे-तैसे हालात पर काबू पाया था। पांच नवंबर को स्थानीय भोजा का नगला के एक दिव्यांग दलित युवक की पुलिस की पिटाई से हुई मौत के चलते भीड़ सड़क पर उतर आई और पुलिसकर्मियों पर जमकर पथराव हुआ और वाहनों में तोड़-फोड़ की।
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इस मामले को नियंत्रित करने में भी पुलिस प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी। इसके अलावा कई और पुलिसकर्मी आरोपोें के घेरे में भी आए। एक पुलिसकर्मी के खिलाफ पुलिस चौकी में एक किशोर से कुकर्म का आरोप भी लगा। इसके अलावा जिले में हत्या, रेप, डकैती और लूटपाट की भी कई घटनाओं ने सभी को हिला दिया। कुछ घटनाओं में मानवता शर्मसार हुई और खून के रिश्ते भी तार-तार हुए। साल के अंत में आवारा पशुओं को लेकर पैदा हुई समस्या से प्रशासन हलकान रहा।
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