समाजवादी पार्टी व राष्ट्रीय लोकदल के बीच हुए गठबंधन में हाथरस की लोकसभा सीट से रालोद प्रत्याशी उतारे जाने से मुकाबला काफी दिलचस्प हो सकता है। लोकसभा हाथरस में अलीगढ़ की विधानसभा इगलास व छर्रा भी शामिल हैं। इगलास में जाट वोट संख्या अधिक है। सादाबाद विधानसभा भी जाट बाहुल्य क्षेत्र है। सिकन्दराराऊ में सपा मुकाबले में रही है। 2009 के लोकसभा चुनाव में रालोद ने यह सीट जीती थी, लेकिन तब उसका गठबंधन भाजपा के साथ था और सारिका सिंह सांसद चुनी गई थी।
भाजपा का रहा है इस सीट पर दबदबा
पिछले आंकड़ों को देखें तो 1991 में भाजपा ने हाथरस सुरक्षित सीट से लाल बहादुर को प्रत्याशी बनाया और उन्होंने नता दल के प्रत्याशी मूलचंद हराकर सीट जीती थी। 1996 से 2004 तक में भाजपा के किशन लाल दिलेर सांसद रहे। उन्होंने चार बार यह सीट जीती। 2014 भाजपा के राजेश दिवाकर और 2019 में भाजपा के राजवीर सिंह दिलेर ने जीत हासिल की।
सपा से दावेदार हुए मायूस
हाथरस लोकसभा सीट से सपा में कई नेता दावेदारी कर रहे हैं और क्षेत्र में सक्रिय है। पूर्व केन्द्रीय मंत्री रामजीलाल सुमन, सपा से राम नारायण काके भी प्रबल दावेदार माने जा रहे थे। ऐसे में सीट रालोद के खाते में जाने से उनको मायूसी का सामना करना पड़ सकता है।
गठबंधन को लेकर हाथरस लोकसभा सीट रालोद के खाते में जाना लगभग तय है, लेकिन इस पर अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। उम्मीद है कि रविवार को स्थिति साफ होगी तब आगे की रणनीति बनाई जाएगी।-देवेन्द्र कुशवाह, जिलाध्यक्ष, समाजवादी पार्टी।