गीता प्रेस को केंद्र सरकार द्वारा जो सम्मान दिया गया है, निश्चित रूप से यह सराहनीय कदम है। जिले के विद्वान शासन से यह मांग कर रहे हैं कि गीता प्रेस को पुरस्कार के साथ साथ इनके निरंतर संचालन के लिए आयोग बनाया जाए। गीता प्रेस का हिंदुत्व में काफी योगदान है। दो साल पूर्व गीता प्रेस बंद होने की कगार पर थी, इसलिए विद्वान शासन से इसके निरंतर संचालन की व्यवस्था करने की मांग कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि गोरखपुर में संचालित गीता प्रेस ने रामायण, गीता, महाभारत, हनुमान चालीसा सहित कई धार्मिक ग्रंथों का प्रकाशन किया है। केंद्र सरकार द्वारा गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार देने की घोषणा की गई है, लेकिन ट्रस्ट ने सम्मान को तो स्वीकार किया है, लेकिन सम्मान में मिलने वाली एक करोड़ की राशि को लेने से इंकार कर दिया है।
ये बोले विद्वान
वैसे तो सरकार का यह सराहनीय कदम है, क्योंकि आज जो हिंदू राष्ट्र की बात उठ रही है, उसे मजबूती देने में गीता प्रेस का बहुत योगदान है। दो साल पूर्व गीता प्रेस बंद हाेने की कगार पर आ गई थी। गीता प्रेस बहुत न्यूनतम दर पर पुस्तकें बेचती है। सरकार से मांग करते हैं। हमेशा के लिए एक आयोग बनाए, ताकि प्रेस का निरंतर संचालन हो। गीता प्रेस की आर्थिक जरूरत को ध्यान रखते हुए इसे सक्षम बनाया जाए।
-आचार्य वल्लभ जी महाराज, विद्वान
गीता प्रेस हिंदुत्व को लेकर चल रही है। गीता प्रेस का संचालन निरंतर हो। इसके लिए सरकार को ठोस कदम उठाना चाहिए। जो गांधी शांति पुरस्कार दिया जा रहा है, यह बहुत ही अच्छा कदम है। इस प्रेस में प्रकाशित पुस्तकों ने हिंदुत्व में जल की तरह सींचने का काम किया है। गीता प्रेस की धार्मिक पुस्तकें काफी कम दर पर उपलब्ध होती हैं। इसके संचालन के लिए ठोस इंतजाम किए जाएं।
-उपेंद्रनाथ चतुर्वेदी, धर्माचार्य
गीता प्रेस हमारी संस्कृति को जीवित रखे हुए है। गीता प्रेस से अच्छा साहित्य कोई नहीं दे सकता है। इसके लिए सभी को आगे आना चाहिए। गीता प्रेस के द्वारा जो राशि लेने से इंकार किया गया है, वह अच्छी बात है। सरकार को गीता प्रेस के संचालन के लिए ठोस इंतजाम करना चाहिए, ताकि संस्कृति को जीवंत रखा जा सके।
-आचार्य विनोद शास्त्री, विद्वान