क्षेत्र के गांव बामौली के प्राथमिक विद्यालय के बच्चे गले में दर्द और सूजन से पीड़ित हैं। पिछले आठ दिनों से बच्चों को यह परेशानी है।इसकी वजह से स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या लगातार घट रही है। अध्यापकों ने इसकी सूचना स्वास्थ्य केंद्र पर दी तो विभाग की टीम ने शिविर लगाकर बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया। बीमार मिले बच्चों को दवा वितरित कराई गई।
प्राथमिक विद्यालय बामौली के प्रधानाचार्य अमित शर्मा ने बताया कि पिछले करीब चार-पांच दिन से गले पर सूजन होने से बच्चों की परेशानी बढ़ रही थी। इसे लेकर पिछले दो दिन से स्कूल में आने वाले बच्चों की संख्या कम होती जा रही है। इस कारण उनके द्वारा यह सूचना स्वास्थ्य विभाग को दी गई थी। स्वास्थ्य विभाग ने शुक्रवार को विद्यालय परिसर में शिविर लगाकर दवा वितरित की।
गले की सूजन से परेशान छात्र-छात्राओं के परिजनों ने गांव बामौली स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के एक चिकित्सक पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात एक चिकित्सक मनमाने तरीके से अस्पताल पर आते हैं। वह अपनी मर्जी से ही बीमार लोगों को दवा वितरण करते हैं। सर्दी, बुखार के अलावा कोई दवा नहीं देता है। मनमाने तरीके से अस्पताल खोला और बंद किया जाता है।
मेरी बेटी को करीब चार दिन से गले में सूजन है। इसकी दवा लेने के लिए वह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बामौली पर गई थीं, लेकिन चिकित्सकों ने दो-तीन तरह की गोली दे दी। इन गोली से कोई फायदा नहीं हुआ है। मजबूरन अब निजी चिकित्सकों के पास जाना पड़ेगा और पैसे खर्च करने पड़ेंगे।
-अनीता, अभिभावक बामौली।
गांव में सरकार ने भले ही गरीबों को दवा देने के लिए अस्पताल खुलवाया है, लेकिन गरीबों को इसका फायदा नहीं मिल पा रहा है। गांव में कई बच्चे गले की सूजन से परेशान हैं, लेकिन चिकित्सकों द्वारा ठीक प्रकार से इलाज नहीं किया जा रहा। इस अस्पताल में मनमाने तरीके से दवा दी जाती है।
-सीता, अभिभावक बामौली
गांव बामौली के विद्यालय में शिविर लगाकर 44 बच्चों को उपचार दिया गया है, जिसमें चार बच्चे टॉन्सिल पीड़ित मिले हैं। इनके गले के पास सूजन थी। यह वायरल संक्रमण प्रतीत हो रहा है। दो दिन बाद फिर से गांव में शिविर लगाया जाएगा और जांच कर दवा दी जाएगी।
-डॉ प्रकाश मोहन, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मुरसान, प्रभारी।