रक्त में चार अवयव होते हैं। इनमें रेड ब्लड सेल (आरबीसी), प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रायोप्रेसीपिटेट शामिल हैं। सेपरेशन यूनिट में रक्त को घुमाया जाता है, जिससे रक्त परत-दर-परत हो जाता है और रक्त के अवयव अलग-अलग हो जाते हैं।
हाथरस के जिला अस्पताल परिसर में शुरू होने वाली रक्त अवयव पृथक्कीकरण इकाई को शुरू होने के लिए लाइसेंस का इंतजार है। इस इकाई में सभी उपकरण अधिष्ठापित हो चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एक सप्ताह के अंदर यह इकाई शुरू हो जाएगी।
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रक्त में चार अवयव होते हैं। इनमें रेड ब्लड सेल (आरबीसी), प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रायोप्रेसीपिटेट शामिल हैं। सेपरेशन यूनिट में रक्त को घुमाया जाता है, जिससे रक्त परत-दर-परत हो जाता है और रक्त के अवयव अलग-अलग हो जाते हैं। इन अवयवों को मरीज की जरूरत के हिसाब से उन्हें चढ़ाया जाता है। बागला जिला अस्पताल में लंबे समय से ब्लड बैंक संचालित है। इसके बावजूद जिले में रक्त अवयव पृथक्कीकरण इकाई नहीं थी, इसलिए मरीजों को प्लेटलेट्स केे लिए दूसरे जिलों के चक्कर काटने पड़ते हैं।
इस परेशानी को ध्यान में रखते हुए शासन ने जिला अस्पताल में रक्त अवयव इकाई शुरू करने का फैसला लिया था। पिछले साल यह इकाई शुरू होनी थी। लेकिन पूरे उपकरण इंस्टाल न होने के कारण इसे शुरू करने में देरी हो गई। इस समय जिले में डेंगू और मलेरिया का प्रकोप बढ़ गया है। इस बीच जल्द ही रक्त अवयव पृथक्कीकरण इकाई शुरू होने वाली है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस इकाई में सभी मशीनें अधिष्ठापित हो चुकी हैं। सिर्फ लाइसेंस मिलने की देरी है। एक सप्ताह के अंदर लाइसेंस मिल जाएगा और इकाई शुरू हो जाएगी।
बागला जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्त अवयव पृथक्कीकरण इकाई जल्द ही शुरू हो जाएगी। इस इकाई में सभी मशीनें अधिष्ठापित हो चुकी हैं। अब सिर्फ लाइसेंस मिलने की देरी है। एक सप्ताह के अंदर लाइसेंस भी मिल जाएगा। - डॉ. सूर्यप्रकाश, सीएमएस जिला अस्पताल हाथरस।