मौसम की मार के चलते इस साल 5 मार्च तक कांवड़ियों की संख्या सड़कों पर कम दिख रही थी, लेकिन 6 मार्च को शहर से गुजरने वाले सभी रास्तों पर कांवड़ियों की कतार नजर आ रही है। इन रास्तों पर बम-बम भोले और हर-हर महादेव की गूंज है। कांवड़ियों की सेवा के लिए जगह-जगह शिविर लगाए गए हैं।
शहर से गुजरने वाले आगरा-अलीगढ़ व मथुरा बरेली राजमार्ग पर कांवड़ियों की अधिक हो गई है। मथुरा-बरेली राजमार्ग पर सोरों व कछला गंगा घाट से कांवड़ लेकर राजस्थान की ओर जाने वाले कांवड़ियों के बढ़े जत्थे 6 मार्च को नजर आए। सीटियों के साथ घुंघरू की रुन-झुन से माहौल भक्ति में डूबा हुआ है। कागसंज की ओर से हाथरस जनपद की सीमा में प्रवेश करते ही कावंड़ियों के जत्थों की सेवा के लिए बड़ी संख्या में समाजसेवियों ने शिविरों का आयोजन किया है। शिविरों में कांवड़ियों के लिए फल, दूध, खाना, दवाएं आदि वस्तुएं मुहैया कराई जा रही हैं। यहां कांवड़ियों की मालिश की व्यवस्था है और उनके लिए दर्द निवारक दवाएं भी उपलब्ध हैं। आगरा-अलीगढ़ राजमार्ग पर कांवड़ियों की संख्या फिलहाल मथुरा-बरेली राजमार्ग की अपेक्षा कुछ कम दिखाई दे रही है।
शहर के मेंडू रोड पर निस्वार्थ सेवा संस्थान के शिविर में पुरुषों के अलावा महिलाएं भी कांवड़ियों की सेवा के लिए अग्रणी दिखाई दीं। शिविर में शहर की कई महिलाओं को महिला कांवड़ियों की सेवा के लिए बुलाया जा रहा है। 6 मार्च को दोपहर के समय महिला कांवड़ियों ने महिला सेवादारों को सेवा का मौका दिया।