मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संजीव कुमार त्रिपाठी के न्यायालय ने 240 बोरे चावल गायब होने के मामले में सिकंदराराऊ के कृषि उत्पादन मंडी समिति के सचिव के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। प्रभारी निरीक्षक सिकंदराराऊ को इस संबंध में न्यायालय को एक सप्ताह के अंदर अवगत कराने के भी निर्देश दिए गए हैं। न्यायालय ने जनपद उन्नाव के एक गल्ला व्यवसायी के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया है।
जनपद उन्नाव के पुरवा निवासी कमल हुसैन ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संजीव कुमार त्रिपाठी के न्यायालय में प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। जिसमें कहा था कि वह एक गल्ला व्यवसायी है और मैसर्स हुसैन ट्रेडर्स के नाम से अपना व्यवसाय करता है। 17 नवंबर 2019 को इसी फर्म से 240 बोरा चावल, कुल वजन 157.10 क्विंटल मंडी समिति पुरवा जनपद उन्नाव से गेट पास प्राप्त कर पंजाब-हिमाचल रोडवेज के वाहन से अग्रवाल राइस कंपनी डांडा रोड जनपद पेहवा हरियाणा को भेजा।
19 नवंबर 2019 को कृषि मंडी समिति सिकंदराराऊ समिति के जांच दल ने मंडी समिति पुरवा उन्नाव द्वारा दिया गया गेटपास संदिग्ध बता कर माल रोक लिया। 23 नवंबर 2019 को मनमानी तरीके से 1,03301 रुपये का शमन शुल्क लगा दिया। शुल्क जमा किया। इस आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय इलाहाबाद के समक्ष 10 दिसंबर 2019 को याचिका प्रस्तुत की।
उच्च न्यायालय इलाहाबाद के आदेशानुसार ने राज्य कृषि उत्पादन परिषद उत्तर प्रदेश ने सभी पक्षों को 18 दिसबर 2019 को बुलाया। सभी पक्षकारों को सुनकर राज्य कृषि उत्पादन परिषद उत्तर प्रदेश ने मंडी समिति सिकंदराराऊ के सभापति के आदेश को विधि विरुद्ध घोषित करते कहा कि शमन शुल्क तीन दिन में लौटाएं।
व्यापारी ने बताया कि समन शुल्क राशि चेक द्वारा उसे मिल गई, लेकिन 240 बोरी चावल न तो अग्रवाल राइस कंपनी पहुंच पाया है न ही उसके पास आया है। अब वो चावल का पता करने में असमर्थ है। कई प्रयास किए परंतु मंडी समिति सचिव सिकंदराराऊ से कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ। इस मामले में कमल हुसैन ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संजीव कुमार त्रिपाठी के न्यायालय में प्रार्थना पत्र दाखिल किया। इस मामले की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने प्रभारी निरीक्षक थाना सिकंदराराऊ को निर्देशित किया है कि उचित धाराओं में अभियोग दर्ज कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।