हाथरस। बेसिक शिक्षा विभाग के पास खेलकूद के लिए न तो बजट है और न ही विद्यार्थियों को खेलकूद के गुर सिखाने के लिए शिक्षक है। ऐसे में ब्लॉक व जिला स्तर पर प्रतियोगिता आयोजित नहीं हो पा रही हैं। खेलकूद शिक्षक न होने से विद्यार्थियों को खेलों की प्राथमिक जानकारी भी नहीं मिल पा रही है। इन हालातों में सीबीएसई बोर्ड के स्कूलों के बच्चों से परिषदीय स्कूलों के बच्चे कैसे मुकाबला करेंगे। इसकी जानकारी बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों से बेहतर कोई नहीं जानता। बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा वैसे तो अनेक योजनाओं के माध्यम से परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को सीबीएसई स्कूलों के मुकाबले खड़ा करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विद्यार्थियों को परिषदीय स्कूलों में पढ़ाने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करने वाले योग्य शिक्षकों की नियुक्ति की जा रही है। स्कूलों में शारीरिक व मानसिक रूप से मजबूती प्रदान करने के लिए मध्याह्न भोजन कराया जा रहा है। विद्यालयों में अनुशासन की झलक दिखे इसके लिए विद्यार्थियों को निशुल्क स्कूल ड्रेस का वितरण किया जा रहा है, जिससे विद्यालयों में विद्यार्थी स्कूल ड्रेस पहनकर पूरे अनुशासन के साथ स्कूल आए। लेकिन इस सब के बावजूद भी इन विद्यालयों के विद्यार्थियों को खेलकूद के अवसर ही नहीं मिल पा रहे हैं। इसकी प्रमुख वजह परिषद के विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की स्कूल फीस शासन स्तर से माफ करना है। उधर, परिषद से खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन कराने के लिए किसी अतिरिक्त बजट की कोई व्यवस्था नहीं है। विभाग अपने यहां खेलकूद शिक्षकों की भी तैनाती नहीं कर रहा है। इस सब के चलते परिषदीय विद्यालयों के बच्चे खेल के महत्वपूर्ण मैदान में लगातार पिछड़ते जा रहे हैं।