हाथरस। प्रकृति की मार के बाद अब धान किसान सिस्टम के सितम से परेशान है। कृषि उत्पादन मंडी समिति धान खरीद करने वाली एजेंसियों को लाइसेंस ही जारी नहीं कर रही है। मंडी में किसानों का धान पड़ा है, लेकिन उन्हें इसका मूल्य ही नहीं मिल पा रहा। खरीफ सीजन में जहां धान और बाजरा किसानों ने प्रकृति की मार झेली है, वहीं उनको अपनी धान की फसल को पकाने में काफी खर्चा भी उठाना पड़ा है, लेकिन अब इन तमाम मुसीबतों को झेलने के बाद किसान अपना धान मंडी में बेचने आ रहा है तो उसे कृषि उत्पादन मंडी समिति परिषद का सिस्टम का सितम झेलना पड़ रहा है। मंडी प्रशासन मंडी में धान खरीद करने आई कंपनियों को धान खरीद कर बाहर ले जाने के लिए परमीशन ही नहीं दे रहा। इसके कारण यह कंपनियां मंडी में धान लेकर आने वाले किसानों का धान नहीं खरीद रही हैं, जिससे किसान मंडी में अपने धान के बिकने के इंतजार में पिछले दो-तीन दिन से पड़ा है। इसका लाभ कुछ बिचौलिए भी मंडी में उठा रहे है और वह किसानों की मजबूरियों का लाभ उठाकर सस्ता धान खरीद रहे हैं। यह लोग 2000 रुपये प्रति क्विंटल में ही अच्छा धान मांग रहे हैं, जबकि इस धान की कीमत पिछले सीजन में 3 से 4 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक रही है।