हाथरस। दिवाली पर वर्षों से लोग घर-घर में मिट्टी के दीपकों में घी और तेल भर कर दीप जलाते हैं। त्योहार पर लक्ष्मी के आगमन के लिए घरों में मिट्टी के दीपकों में घी और तेल भरकर जलाना शुभ माना जाता है, लेकिन वर्तमान में इसका क्रेज कम हो रहा है। फैशन की चकाचौंध में लोग मिट्टी के दीपक खरीदने की जगह चाइना मेड रेडीमेड मोम के दीपकों को खरीद कर त्योहार पर जलाते हैं। बाजार में चाइना मेड दीपकों की डिमांड बढ़ रही है, इसलिए अब मिट्टी के दीपक का काम भी कम होता जा रहा है। मिट्टी के दीपक बनाने वाले गांव सुरंगपुरा निवासी गुलाब सिंह का कहना है कि उनका परिवार कई पीढ़ियों से इस काम से जुड़ा है। जैसे-जैसे समय बीत रहा है, मिट्टी के दीपकों की डिमांड में कमी आती जा रही है। फैशन के दौर में अब कुछ लोग मिट्टी के दीपक कम खरीदते हैं। इसकी मुख्य वजह बाजार में बिकने वाले चाइना के बने रेडीमेड दीपक हैं। उन्होंने कहा कि हर वर्ष दीपक बनाने काम कम होता जा रहा है। मिट्टी के दीपक बनाने का काम कई पुश्तों से चला आ रहा है। दीपक बनाने के लिए मिट्टी लाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। प्रशासन को इस काम को जीवित रखने के लिए सहयोग करना चाहिए। त्योहार पर मिट्टी के दीपक 25 से 30 रुपये प्रति सैकड़ा के हिसाब से बेच रहे हैं। हर वर्ष मिट्टी के दीपकों की बिक्री घट रही है।