क्षेत्र के गांव धुबई की तरफ से आने वाले रजवाहे की पटरी 27 दिसंबर की सुबह कट गई, जिससे 14 किसानों की करीब साढ़े 400 बीघा गेहूं और आलू की फसल जलमग्न हो गई। सुबह जब किसान खेत पर पहुंचे तो चारों तरफ पानी देखकर उनके माथे पर चिंता के बल पड़ गए।
किसानों ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को फोन पर इसकी सूचना दी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। नाराज किसानों ने क्षतिग्रस्त फसल के मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया। बाद में किसानों ने निजी खर्चे पर जेसीबी मंगवाकर पटरी की मरम्मत कराके पानी की रोकथाम की।
क्षेत्र के गांव धुबई नगला डांडा के रास्ते होकर गुजर रहे रजवाहे की पटरी कटने की जानकारी किसानों को सुबह करीब चार बजे उस वक्त हुई, जब वह खेत पर पहुंचे। रजबहे के पानी से किसान जयप्रकाश, ऊदल सिंह, सतीश, शीलेंद्र, देवेंद्र, अनिल, सुग्रीव, पाली साहब, राधेश्याम, तोताराम, भूरी सिंह और हरी सिंह सहित कई किसानों की गेहूं और आलू की फसल जलमग्न हो गई।
किसानों ने रजवाहे की पटरी पर बनी खंदी को रोकने का काफी प्रयास किया। गांव शीतलवाड़ा के किसानों ने बताया कि सिंचाई विभाग द्वारा पुल का निर्माण किया जा रहा था, लेकिन विभाग के कर्मचारी बिना पुल का निर्माण पूरा किए अधूरा छोड़कर चले गए। इस बीच सिंचाई विभाग ने जाऊ नहर में पानी भी छोड़ दिया। इस कारण धुबई माइनर में पानी आने के कारण उनके गांव के रजवाहे में भी पानी आ गया, जिससे दूसरी बार पटरी कटने से फसल जलमग्न हुई हैं। किसानों ने बताया कि आलू की करीब डेढ़ सौ बीघा और गेहूं की करीब 300 बीघा फसल जलमग्न हुई है।