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Hardoi News: गीत ऐसा भी लिखवा दे माई, जिसमें खुशबू वतन की हो

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मल्लावां । वैसे पहचान कोई खास नहीं, फिर भी एक शायर हूं, बताते हुए डर लगता है। और फिर जहां एक गीत ऐसा भी लिखवा दे माई, जिसमें खुशबू वतन की हो समाई... कविता पवन प्रगति ने पढ़ी तो चारों ओर तालियां गूंज उठीं।
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दरअसल, द विश्वास फाउंडेशन की ओर से कस्बे के पटेल गेस्ट हाउस में जश्न-ए-आजादी पर कवि सम्मेलन हुआ। इसमें कवियों ने देश प्रेम की कविताएं सुनाकर समा बांध दिया। शुभारंभ कवि पवन प्रगति की कविता से हुआ।
कवि आदर्श विश्वास ने जिंदा रखने का हौसला रखिये, किंतु सबसे न राब्ता रखिये, जो किसी से भी वास्ता न रखे, ऐसे लोगों से वास्ता रखिये। सलमान जफर ने नाराज एक पड़ोसी जनाजे में आ गया, सिलवट एक और मेरे कफन से निकल गई। जाने कैसा कैफ तारी है तुम्हारे शहर में, मुस्कराते हैं सभी और बोलता कोई नहीं कलाम पेश किया।
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कवि अंकित काव्यांश ने राम होना सरल ही नहीं था कभी, जो सरल हो गया वही राम है। इसके अलावा शादाब खान, सत्याधार सत्या, सहित कई अन्य कवियों व शायरों ने भी अपने-अपने कलाम पेश किए।
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