भरावन (हरदोई)। मौसम के उतार चढ़ाव के बीच रबी की फसलों को संभालने में जुटे किसानों को जरूरत के वक्त सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल रहा है। कुछ नहरों के टेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है तो कुछ के हेड के हलक ही सूखे हैं।
वहीं, कुछ सरकारी ट्यूबवेल भी ध्वस्त पड़े हैं तो कुछ बिजली की कमी के कारण शोपीस बने हुए हैं। सरकार ने भले ही हरदोई को सूखे की लिस्ट से बाहर रखा हो लेकिन यहां किसानों की स्थिति काफी खराब हो गई है। एक तरफ जिला सूखे की सूची में शामिल भी नहीं किया गया, दूसरी ओर पानी भी न मिलने से यहां के किसान अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
किसानों के लिए सिंचाई की समस्या दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही है। सूखी पड़ी नहरों में पानी की जगह धूल उड़ रही है। किसान बूंद बूंद पानी को तरस रहे हैं जिससे सरकार की नि:शुल्क सिंचाई योजना बेमतलब साबित हो रही है।
इंसेट
आधे से ज्यादा नलकूप ध्वस्त
भरावन। सूखे का दंश झेल रहे किसान माथे पर हाथ रख कर किस्मत को कोस रहे हैं। ब्लाक के आधे से अधिक नलकूप ध्वस्त पड़े हैं। कई छोटी-मोटी समस्याओं के चलते बंद पड़े हैं। बनी गांव स्थित ट्यूबवेल नंबर 22 ध्वस्त पड़ा है। यहां न तो बिजली की लाइन है और न ही मोटर। ट्यूबवेल का ढांचा भी लगभग ढह चुका है। वहीं, बंगालपुर, सांडा दखलौल, शिवपुरी व छावन स्थित नलकूप भी छोटी मोटी समस्याओं के कारण बंद पड़े हैं। आपरेटर ईश्वरी प्रसाद ने बताया कि कई बार अधिकारियों से नलकूप ठीक कराने के लिए कहा गया लेकिन कोई सुनता ही नहीं। अतरौली, भैंसासुर, जाजूपुर, जीवनखेड़ा राजकीय नलकूप भी बंद पड़े हैं।
यहां नहीं पहुंच रहा नहर का पानी
भरावन। नहरों के कटने व उनकी सफाई न करवाने के कारण क्षेत्र के दर्जनों गांवों में नहरों का पानी नहीं पहुंच पा रहा है। गढ़ी नेवादा, मढ़िया, सोनिकपुर, सुजेहटा, जनिगांव, पट्टी हरपालपुर, शंकरपुर, भगवानखेड़ा, पवायां, भूडखेड़ा, संभलखेड़ा, बम्हनौआ आलमशाह, किरला, गायबखेड़ा, फत्तेपुर, वृंदावन सहित ऐसे दर्जनों गांवों में नहरें सूखी होने के कारण किसान पानी को तरस रहे हैं।
मौसम की अठखेलियां भी ठनका रहीं किसानों का माथा
भरावन। बदलते मौसम को देख किसानों परेशान हैं। बीते सप्ताह हुई बूंदाबांदी से भी फसल को काफी नुकसान हुआ है। जरूरत भर पानी न मिल पाने के कारण एक ओर फसल सूख रही है तो दूसरी ओर मौसम के तेवर से भी किसान हलाकान हैं। किसानों का कहना है कि खेतों में पानी लगा लगाकर वह परेशान हैं। दो दिन के लिए भी खेतों में नमी नहीं रुक रही। नहरों से पानी मिले तो ही पानी की जरूरत पूरी हो। वाटर लेबल गिरने के कारण ट्यूबवेल भी जवाब दे रहे हैं।