हरदोई। विकास, निर्माण सहित सार्वजनिक संपत्तियों के कायाकल्प के लिए गांवों को बड़ी मात्रा में राशि आवंटित हो रही है। यहां पर 100 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जहां पर गांव तो विकास के लिए तरह रहे हैं। इन पंचायतों के खातों में करीब पांच करोड़ रुपये से अधिक डंप हैं। राशि को खर्च न किए जाने, सार्वजनिक उपयोग के पंचायत भवन, सामुदायिक शौचालय, स्कूलों के कायाकल्प आदि न कराए जाने से यह अनुपयोगी साबित हो रहे हैं।
वैसे तो 19 विकास खंडों में यहां पर 1293 ग्राम पंचायतें हैं। 100 ग्राम पंचायतों में राज्य वित्त आयोग और केंद्रीय वित्त आयोग की मद में राशि डंप है। खातों में राशि होने के बाद भी विकास, निर्माण न कराए जाने से गांवों में मार्ग, नाली, जल संरक्षण व संग्रहण के कामों के साथ ही सार्वजनिक उपयोग के भवन भी अनुपयोगी बने हुए हैं। खातों में राशि डंप होने से जनपद की स्थिति प्रदेश में पिछड़ी हुई है। केंद्रीय वित्त आयोग की मद में 44 और राज्य वित्त आयोग की मद में 46 ग्राम पंचायतों में खर्च कम रहा है।
देखा जाए तो, केंद्रीय वित्त आयोग में विकास खंड भरावन की महीठा और टोडरपुर की कोठिला सरैंया में चालू वित्तीय वर्ष में कोई खर्च नहीं हुआ है। इससे इनके साथ ही 100 ग्राम पंचायतों के लोगों को आधारभूत सुविधा, सहूलियत नहीं मिल पा रहीं हैं।
कम व शून्य खर्च वाली ग्राम पंचायतों से जुड़े ब्लॉकों के खंड विकास अधिकारियों, सहायक विकास अधिकारी पंचायत से कहा गया है कि वह गांवों की कार्ययोजना के अनुसार प्राथमिकता के कामों, मिशन कायाकल्प के तहत पंचायत भवन, स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों पर कामों को कराएं। काम में लापरवाही करने वाले प्रधान व पंचायत सचिवों के संबंध में सूचना प्राप्त कराएं, ताकि कार्रवाई की जा सके।
मंगला प्रसाद सिंह, जिलाधिकारी
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भरावन की महीठा की प्रधान गीता देवी ने बताया कि करीब डेढ़ साल तक उनके अधिकार सीज रहे। इस अवधि में तीन सदस्यी समिति बनी थी। समिति और पंचायत सचिवों ने कोई काम ही नहीं कराया। सितंबर में अधिकार बहाल हुए हैं। आरआरसी, किचनशेड, मिशन कायाकल्प के साथ गांव में इंटरलॉकिंग, आरसीसी रोड व नाली निर्माण को कार्ययोजना में शामिल किया गया है। करीब 10 लाख की कार्ययोजना हमारी पंचायत पर अपलोड हो चुकी है। जल्द ही काम भी शुरू कराया जाए।