बच्चे का प्रवेश कराने के लिए कार व आरओ प्लांट के मालिक भी बन गए गरीब
- अलाभित समूह के लिए 341 बच्चों ने किया है आवेदन
- एक लाख रुपये से कम वार्षिक आय के परिवार के बच्चों को दिया जाना है मौका
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। अलाभित समूह योजना के तहत निजी विद्यालयों में बच्चे का प्रवेश कराने के लिए कार व आरओ प्लांट संचालक भी गरीब बन गए हैं। आवेदन में उनकी कम आय विभागीय चयन समिति के लिए समस्या बन गई है। वहीं आवेदकों ने निजी स्कूलों के लिए निवास स्थान तक परिवर्तित कर दिए हैं। सत्यापन में इसका खुलासा होने पर विभाग में खलबली मची हुई है।
अनिवार्य शिक्षा अधिनियम के तहत बच्चा अपने निकटतम विद्यालय में शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार रखता है। कोई भी विद्यालय बच्चों का प्रवेश लेने से मना नहीं कर सकते हैं। शासन की ओर से निजी स्कूलों पर आर्थिक बोझ न बढ़े इसके लिए अलाभित समूह के बच्चों के लिए चयन प्रक्रिया शुरू की गई। इसके तहत शासन की ओर से प्रति छात्र 450 रुपये प्रतिमाह की दर से 11 माह का शुल्क संबंधित विद्यालयों को दिया जाता है। इसके अलावा पांच हजार रुपये अभिभावक के खाते में भेजे जाते हैं। इस पैसे से बच्चे की काॅपी-किताबें व ड्रेस की खरीद की जाती है। विभाग की ओर से इसके लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे। इसमें अभिभावक की आय एक लाख रुपये से कम होने और अभिभावक का संबंधित वार्ड व ग्राम पंचायत का निवासी होना आवश्यक है। विभाग को इस वर्ष प्रथम चरण में 341 बच्चों के आवेदन प्राप्त हुए। इनका भौतिक सत्यापन खंड शिक्षा अधिकारी व एआरपी के माध्यम से कराया जा रहा है। अब तक हुए सत्यापन में कई मामले ऐसे प्रकाश में आए हैं, जो चौकाने वाले हैं।
सत्यापन में ऐसे मामले आए सामने
एक बच्चे के सत्यापन में पाया गया कि उसके अभिभावक के पास कार है और उसका आय प्रमाण पत्र एक लाख से कम है। वहीं एक और बच्चे के अभिभावक का आरओ प्लांट लगा है, मगर उसकी वार्षिक आय 80 हजार रुपये दिखाई गई है। इसके अलावा कई ऐसे आवेदन आए हैं, जिनका निवास स्थान संबंधित वार्ड व ग्राम पंचायत में नहीं है और उन्होंने किरायानामा उस वार्ड का लगा रखा है। विभाग के सत्यापन में सरकारी आय प्रमाण पत्र और भौतिक सत्यापन में अलग-अलग आख्या आने से खलबली मची हुई है।
कोट
अभी आवेदनों का सत्यापन चल रहा है, जो सत्यापन हुए हैं, उनमें कई ऐसे मामले आए हैं और कई आवेदन दूसरे स्थान से किए गए हैं। सभी की आख्या जिला चयन समिति के सामने रखी जाएगी। जिला चयन समिति आवेदन पर निर्णय लेगी। - राकेश शुक्ला, जिला समन्वयक सामुदायिक शिक्षा