हरदोई। बीती 30 जुलाई की रात वरिष्ठ अधिवक्ता कनिष्क मेहरोत्रा की हत्या के मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। संपत्ति विवाद में चार लोगों ने चार लाख रुपये की सुपारी देकर भाड़े के हत्यारों से घटना अंजाम दिलाई।
जिनमें से एक मुठभेड़ के दौरान पुलिस की गोली लगने से घायल हो गया। इस बीच साजिश रचने के आरोप में सपा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष समेत चार लोगों को जेल भेज दिया गया है। मुख्य शूटर और उसके दो सहयोगियों की पुलिस को तलाश है। एसपी ने घटना का खुलासा करने वाली पुलिस टीम को 25 हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की है।
एसपी नीरज कुमार जादौन ने बताया कि लखनऊ रोड पर सिनेमा चौराहा के पास जिस मकान में कनिष्क मेहरोत्रा रहते थे, उसे छह लोगों ने वर्ष 2011 में खरीद लिया था। बाद में इनमें से दो लोगों ने अपना हिस्सा साथियों को ही बेच दिया था। इसके बाद मकान पर मालिकाना हक सपा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष बीरेंद्र यादव उर्फ बीरे, नृपेंद्र त्रिपाठी, शिखर गुप्ता और आदित्यभान सिंह के पास आ गया था। कनिष्क मेहरोत्रा उक्त मकान में लगभग चालीस वर्ष से किराए पर रह रहे थे।
मकान खरीदने वालों ने कई बार मकान खाली करने के लिए कहा था, लेकिन कनिष्क मकान खाली नहीं कर रहे थे। इसी के चलते कनिष्क मेहरोत्रा की हत्या की गई। एसपी ने बताया कि जोगीपुर निवासी रामू महावत ने आदित्य और बीरे यादव के साथ डेयरी का काम किया था। इसके चलते वह परिचित थे। पुलिस के मुताबिक बीरे यादव, नृपेंद्र त्रिपाठी, शिखर गुप्ता और आदित्य ने रामू को हत्या की सुपारी दी। चार लाख रुपये में डील तय हुई। एक लाख चालीस हजार रुपये एडवांस में दे दिए गए।
रामू महावत ने जोगीपुर निवासी राम सेवक उर्फ लल्ला, राजवीर और नीरज को घटना अंजाम देने के लिए तैयार कर लिया। घटना के दिन राजवीर अधिवक्ता के घर के बाहर खड़ा रहा, जबकि नीरज और लल्ला से अधिवक्ता से मिलने गए। यहां नीरज फाइल लिए खड़ा रहा और लल्ला ने गोली मार दी। बाद में राजवीर के साथ सारे आरोपी भाग निकले। मुखबिर की सूचना पर घेराबंदी किए जाने के दौरान बावन मार्ग पर निर्माणाधीन बाईपास के निकट पुलिस की मुठभेड़ नीरज से हो गई।
घटना में पुलिस की गोली से नीरज घायल हो गया। उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एसपी ने बताया कि हत्या की साजिश रचने, सुपारी देने के आरोप में आदित्यभान सिंह उर्फ लालू सिंह, बीरेंद्र यादव उर्फ बीरे यादव, शिखर गुप्ता और नृपेंद्र त्रिपाठी को गिरफ्तार किया गया है। इन चारों के साथ ही मुठभेड़ में घायल नीरज को भी गिरफ्तार किया गया है। सभी आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। पुलिस अभी रामू महावत, रामसेवक उर्फ लल्ला और राजवीर की तलाश कर रही है।
कनिष्क मेहरोत्रा जिस किराए के मकान में पिछले चालीस वर्ष से रहते थे, वह इमारत 6160 स्क्वायर फिट में बनी हुई है। वर्ष 2011 में इस मकान को नृपेंद्र त्रिपाठी, आदित्यभान सिंह, नीरज वाजपेयी, अखिलेश गुप्ता, बीरे यादव और नीतेश गुप्ता ने खरीदा था। लिखा-पढ़ी में इसके लिए 13 लाख रुपये दिए गए थे। मकान का बैनामा रामस्वरूप अस्थाना से कराया गया था। किराए पर रहने वाले अधिकांश लेागों को आरोपियों ने आर्थिक ताकत का इस्तेमाल कर बेदखल कर दिया था। कनिष्क मेहरोत्रा मकान खाली नहीं कर रहे थे और इसको लेकर कानूनी लड़ाई भी लड़ रहे थे। आरोपी उक्त स्थान पर वाणिज्यिक भवन बनाना चाहते थे। लंबे समय से मामला सिर्फ कनिष्क मेहरोत्रा की वजह से न सुलझने के कारण हत्या की साजिश रची गई।
घटना को अंजाम देने के लिए बाइक आदित्यभान सिंह ने राम सेवक उर्फ लल्ला को उपलब्ध कराई थी। चार लाख रुपये की सुपारी में से एक लाख चालीस हजार रुपये एडवांस दिए गए थे। इनमें पचास हजार रुपये नृपेंद्र त्रिपाठी ने, पचास हजार रुपये बीरे यादव ने और चालीस हजार रुपये आदित्यभान सिंह ने दिए थे। शिखर गुप्ता ने काम होने के बाद अपना हिस्सा देने की बात कही थी। घटना को अंजाम देने की साजिश दो माह से बनाई जा रही थी। आए दिन इसके लिए यह लोग रफी अहमद चौराहा के पास एकत्र होते थे। घटना से पहले राम सेवक, राजवीर और नीरज ने कई बार एक ही ठेके पर शराब पी थी।
घटना का खुलासा करने के लिए एसपी नीरज कुमार जादौन ने सात टीमें गठित की थीं। एसपी खुद पूरे मामले की निगरानी कर रहे और अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी नृपेंद्र को सिर्फ इसी घटना के खुलासे पर लगा दिया था। घटना का खुलासा करने के लिए पुलिस ने 183 कैमरे देखे। इनकी 71 घंटे की फुटेज भी पुलिस ने खंगाली। सोल्जर बोर्ड चौराहा के पास स्थित शराब के ठेके में लगे कैमरे से फुटेज मिली तो इनका मिलान घटनास्थल पर लगे कैमरों में नजर आए आरोपियों से किया गया। यहां से बात बनने लगी तो फिर लखनऊ चुंगी, सरकुलर रोड, सांडी चुंगी तक के कैमरे खंगाले गए। शाहजहांपुर रोड और पिहानी रोड पर लगे कैमरे भी देखे गए। इनसे महत्वपूर्ण सुराग मिलते चले गए। 661 मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल भी निकाली गई। इन पर जब विस्तार से काम हुआ तो हत्यारोपी तक पुलिस पहुंच गई। घटना से आधा घंटा पहले लल्ला की बातचीत आदित्यभान से हुई थी। घटना के बाद 7:40 बजे लल्ला ने आदित्य को फोन कर काम हो जाने की बात कही थी। घटना के समय नीरज के बाल बड़े बड़े थे। वह पहचान में न आए इसलिए घटना के बाद उसने शाहजहांपुर रोड पर बढ़ैयनपुरवा में एक दुकान पर पचास रुपये देकर बाल बिल्कुल छोटे करा लिए।
विवेचना के दौरान पुलिस को पता चला कि घटना से बीस दिन पहले मकान खाली करने को लेकर कनिष्क मेहरोत्रा को धमकी दी गई थी। उन्हें 15 से 50 लाख रुपये और धर्मशाला रोड पर एक प्लाट दिए जाने का प्रस्ताव दिया गया था। कनिष्क मेहरोत्रा ने प्रस्ताव ठुकरा दिया और धमकी दिए जाने को भी हल्के में लिया। चर्चा यह भी है कि दो हजार स्क्वायर फिट में मकान बनवाकर दिए जाने का प्रस्ताव भी दिया गया था। एसपी ने अपील की है कि कोई धमकी दे तो पुलिस को जानकारी जरूर देनी चाहिए।
एसओजी के प्रभारी निरीक्षक ब्रजेश कुमार मिश्रा, सर्विलांस के प्रभारी उपनिरीक्षक संतोष सिंह, एसओजी के दीवान रामकृष्ण द्विवेदी और बीरन सिंह यादव, सिपाही ब्रजनंदन, स्वाट टीम का सिपाही मंजेश कुमार, दीवान आनंद और अनिल सिंह चंदेल, सर्विलांस टीम के सिपाही ओमवीर, अंकुर चौहान, यादवेंद्र सिंह का खुलासे में महत्वपूर्ण प्रयास रहा। साथ ही शहर कोतवाल संजय पांडेय, जेल चौकी प्रभारी मार्कंडेय सिंह, शहर कोतवाली के उपनिरीक्षक अनुराग सिंह, दीवान सुशील पटेल और सिपाही कौशल देव व चंद्रशेखर पटेल भी खुलासे में शामिल रहे।
अधिवक्ता हत्याकांड में गिरफ्तार नीरज के खिलाफ कई गंभीर मामले विचाराधीन हैं। लखनऊ के काकोरी निवासी एक टैक्सी चालक की हत्या कर टैक्सी लूटने का मामला उन्नाव जनपद के सोहरामऊ थाने में दर्ज है। लोनार कोतवाली में किराए पर बोलेरो बुक कर ड्राइवर को फेंककर गाड़ी ले जाने का मामला दर्ज है। शहर कोतवाली में बाइक से कुचलकर एक शख्स की हत्या का मामला भी नीरज के खिलाफ दर्ज है। कछौना कोतवाली में भी लापरवाही से वाहन चलाकर दुर्घटना कर देने का मामला दर्ज है।
नीरज न सिर्फ शातिर है बल्कि सोशल मीडिया पर भी सक्रिय रहता है। उसकी फेसबुक पर चार आईडी हैं, जिनमें तीन लॉक हैं। एक आईडी खुली है और इस पर आखिरी पोस्ट 6 जनवरी 2023 को अपडेट की गई थी। इसके अलावा सोशल मीडिया पर भाई ऑफ उत्तर प्रदेश ग्रुप (भईया जी) का सदस्य भी है। सोशल मीडिया पर दबंगई दर्शाती उसकी कई तस्वीरें भी हैं। एक तस्वीर में वह रायफल भी हाथ में लिए नजर आ रहा है।
कनिष्क मेहरोत्रा की हत्या को लेकर अधिवक्ता आक्रोशित थे। दो अगस्त तक खुलासा न होने पर उग्र प्रदर्शन की चेतावनी भी बार एसोसिएश ने दी थी। घटना के खुलासे के बाद एसपी नीरज कुमार जादौन बार एसोसिएशन के सभागार पहुंचे। जहां अधिवक्ताओं ने खड़े होकर तालियां बजाकर उनका स्वागत किया। बार के अध्यक्ष कृष्ण दत्त शुक्ला उर्फ टुल्लू बाबू ने इस दौरान निष्पक्ष, समयबद्ध और सही कार्रवाई के लिए एसपी की सराहना की। एसपी ने इस मौके पर कहा कि घटना का खुलासा चुनौतीपूर्ण था। सीसीटीवी फुटेज से महत्वपूर्ण सुराग मिले। उन्होंने कहा कि सभी को अपने अपने घरों में सीसीटीवी कैमरे लगवाने चाहिए। महामंत्री महेंद्र प्रताप सिंह ने भी पुलिस के कार्यशैली की सराहना की।
हत्यारोपियों को कड़ी सुरक्षा में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में पेश किया गया। यहां से सभी को जेल भेज दिया गया। इसी दौरान आक्रोशित अधिवक्ताओं ने पुलिस की जिस गाड़ी में आरोपी बैठे थे, को घेर लिया। जमकर नारेबाजी की और आक्रोश जताया। किसी तरह पुलिस ने मशक्कत कर अधिवक्ताओं से बचाकर आरोपियों को जेल तक पहुंचाया।