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Hardoi News: पौत्र की तेरहवीं में जा रहे पिता और दवा लेकर आ रहे अधेड़ की गई थी जान

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हरदाेई/बेहंदर। उन्नाव में हुए बस हादसे में हरदोई जिले के अलग अलग इलाकों में रहने वाले दो लोगों की भी मौत हो गई। सोमवार को दोनों के शव गांव भेजे गए। मृतकों में एक चर्मरोग की दवा लेकर वापस घर आ रहा था, तो दूसरा कानपुर से पौत्र के तेरहवीं संस्कार में शामिल होने के लिए निकला था।
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कासिमपुर थानाक्षेत्र के अकोहरा नेवादा गांव निवासी नन्हक्के (60) कानपुर में रहकर ठेला लगाता था। उसके पुत्र मोहित कुमार ने 23 मार्च को फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली थी। उसके तेरहवीं संस्कार में शामिल होने के लिए नन्हक्के रविवार को कानपुर से बस से गांव आने के लिए निकला था। उन्नाव के सफीपुर थाना क्षेत्र के जमालुद्दीनपुर गांव के पास हुए सड़क हादसे में 20 लोग घायल हो गए थे, जबकि छह लोगों की मौके पर मौत हो गई थी। घायलों में नन्हक्के भी शामिल था। उसने इलाज के दौरान देर रात दस बजे दम तोड़ दिया। परिवार में पत्नी सविता और दो बेटे हैं।
टड़ियावां थाना क्षेत्र के सिकरहना मजरा सिकरोहरी निवासी आशाराम (54) चर्मरोग से ग्रस्त थे। वह गांव के ही नरेंद्र कुमार (45) के साथ चर्मरोग की दवा लेने कानपुर के एक अस्पताल गए थे। दवा लेकर घर आने के लिए आशाराम और नरेंद्र बस में सवार हुए थे। रास्ते में बस हादसे का शिकार हो गई। घटना में आशाराम की मौत हो गई, जबकि नरेंद्र घायल है। आशाराम के परिवार में पत्नी मायावती, दो पुत्र और दो पुत्रियां हैं।
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