संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। जिले की विद्युत व्यवस्था को बेहतर बनाने की कवायद महज कागजी ही साबित हो रही है। बिजली कटौती, लोकल फाल्ट के कारण बिजली गुल हो जाने के चलते उपभोक्ता आक्रोशित हो जाते हैं। निशाने पर जनप्रतिनिधि आ जाते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि जिले में तैनात बिजली विभाग के जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण ही ऐसा हो रहा है।
भीषण गर्मी में मांग बढ़ने पर आपूर्ति प्रभावित होने की बात तो समझ में आती है, लेकिन इस मौसम में भी शासन के निर्देशों के मुताबिक बिजली नहीं मिल पा रही है। बिजली का कनेक्शन देने से लेकर फुंकने पर ट्रांसफार्मर बदलने तक में अगर विभाग को झटका लग रहा है, तो इसके लिए जिम्मेदार भी विभाग के अफसर ही हैं।
दरअसल पिछले कई माह से अलग-अलग कार्याें की टेंडर प्रक्रिया चल रही है, लेकिन इन्हें फाइनल नहीं किया जा रहा है। कहीं अनुबंध गठित नहीं हो रहे, तो कहीं टेंडर की प्रक्रिया ही अधूरी है। टेंडर फाइल न होने के कारण अधिकांश कार्य लंबित ही रह जाते हैं।
अगर किसी उपभोक्ता को बिजली कनेक्शन के लिए 40 मीटर का केबिल उपयोग में लाना है, तो संविदाकर्मी यह काम कर देंगे। इससे इतर अगर किसी का मकान कनेक्शन दिए जाने के स्थान से साठ मीटर है तो यह कार्य टेंडर के जरिए चयनित कार्यदायी संस्था से कराया जाता है। जनपद में इसके लिए कार्यदायी संस्था चयनित करने को निविदा प्रक्रिया शुरू की गई थी।
अगस्त में निविदा प्रक्रिया पूरी भी हो गई, लेकिन किसी कार्यदायी संस्था को अब तक इसके लिए अधिकृत नहीं किया गया। इसके कारण सिर्फ शहर में ही 200 से अधिक उपभोक्ताओं को कनेक्शन नहीं मिल पा रहे हैं।
ट्रांसफार्मरों की मरम्मत और बदलने का टेंडर भी नहीं हुआ
ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी इलाकों तक में लगे ट्रांसफार्मर आए दिन खराब होते हैं। इन ट्रांसफार्मरों को बदलने और खराब ट्रांसफार्मर क मरम्मत के लिए ट्रांसफार्मर कैरिज का टेंडर होता है। इसके अलावा तारों के टूटने पर मरम्मत और तार बदलने का काम भी टेंडर के जरिए चयनित संस्था से कराया जाता है।
जनपद में सात माह से इसके कार्य के लिए कोई संस्था ही चयनित नहीं है। ऐसे में ट्रांसफार्मर बदलने के लिए जुगाड़ का इस्तेमाल होता है। ग्रामीण इलाकों में गांव वाले खुद ट्रैक्टर-ट्राली लेकर विद्युत उपकेंद्र पहुंच जाते हैं, तो नगरीय क्षेत्र में यह बोझ विभागीय कर्मचारियों को खुद ही उठाना पड़ता है।
10 और पांच एमवीए के ट्रांसफार्मरों की मरम्मत पर भी जुगाड़ से काम
जिले में बड़ी संख्या में उपकेंद्रों में दस और पांच एमवीए के ट्रांसफार्मरों से बिजली आपूर्ति की जाती है। इन ट्रांसफार्मरों की मरम्मत विशेषज्ञ ही कर पाते हैं। इसके लिए भी वर्ष भर का ठेका दिया जाता है। प्राइवेट क्षेत्र की कंपनियां इसमें टेंडर हासिल करने के लिए मशक्कत करती हैं।
जनपद में इस वर्ष अब तक इसका ठेका ही नहीं हुआ है। ऐसे में जब यह ट्रांसफार्मर खराब होते हैं, तो विभागीय अवर अभियंता और उपखंड अधिकारी अपने स्तर से जुगाड़ लगाकर इनकी मरम्मत कराते हैं।
डेढ़ साल से नहीं हो पाई उपकेंद्रों की टेस्टिंग
नियमित विद्युत आपूर्ति के लिए उपकेंद्रों की टेस्टिंग की जाती है। इस टेस्टिंग में उपकेंद्र पर लगीं सभी मशीनों की जांच की जाती हैं। आमतौर पर हर पांच से सात माह में उपकेंद्रों की टेस्टिंग कराई जाती है, लेकिन जिले में डेढ़ साल से विद्युत उपकेंद्रो की टेस्टिंग नहीं हुई।
इसकी वजह यह है कि उपकेंद्रों की टेस्टिंग का काम निविदा प्रक्रिया पूरी कर निजी क्षेत्र की संस्थाओं को सौंपा जाता है। जनपद में पिछले सात माह से किसी संस्था का चयन ही विभागीय अधिकारी नहीं कर पाए।
वर्जन
हरदोई में बड़ी संख्या में टेंडर प्रक्रिया लंबित होने की शिकायत अन्य माध्यमों से भी मिली है। अधीक्षण अभियंता की जिम्मेदारी होती है कि समय से टेंडर प्रक्रिया पूरी कर संबंधित संस्था को अनुबंध पत्र भी दे दें। समय से प्रक्रिया पूर होने पर उपभोक्ताओं को दिक्कत नहीं होती। अधीक्षण अभियंता को सभी टेंडर प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए हैं। जल्द ही खुद हरदोई आकर इसकी समीक्षा करूंगा।
राजीव कुमार सिंह
मुख्य अभियंता, बिजली