हरदोई। वैसे तो प्रदूषण को नियंत्रित किए जाने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। दीपावली पर पटाखा न जलाए जाएं ऐसा संभव ही नहीं है। ऐसे में रविवार रात जमीन से लेकर आसमान तक धमाके होंगे।
पटाखों की रंग-बिरंगी रोशनी और अनार आदि चलाए जाने से इससे निकलने वाले धुएं का असर वातावरण पर भी पड़ेगा। यहां पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कार्यालय नहीं है। ऐसे में वातावरण (वायु) में प्रदूषण की निगरानी उन्नाव से होती है।
दीपावली पर दीयों और मोमबत्ती को जलाकर लोग घरों से लेकर प्रतिष्ठानों को रोशनी से जगमग करेंगे। दीपावली पर पारंपरिक अलाय-बलाय निकालने के बाद पूजन-अर्चन के बाद दीयों को जलाने के साथ ही पटाखों को दगाने का चलन है।
दुकानदारों ने बताया कि वैसे तो इस बार ग्रीन पटाखा बाजार में आएं हैं। पटाखा चलाए जाने से धुआं और गंध तो पनपेगी ही। ऐसे में वातावरण में प्रदूषण पनपना असंभव नहीं है।
यहां पर प्रदूषण के छह मानकों पर होने वाली जांच के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कार्यालय ही नहीं है। उन्नाव में क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी का कार्यालय है और वहीं से प्रदूषण की निगरानी की जा रही है। ऐसे में यहां पर वायु, जल और फैक्टरियों में प्रदूषण की जांच के लिए उन्नाव से ही टीम आती है।
शुक्रवार रात बहुत बारिश तो नहीं हुई लेकिन, वातावरण में पनप रहे प्रदूषण व धुंध से राहत दिलाने का काम किया है। बारिश ने वातावरण में पनप रहे धुआं, धुंध और प्रदूषण को कम कर लोगों को काफी राहत दी है।