हरदोई। एससी-एसटी छात्र-छात्राओं के लिए संचालित छात्रावासों के रख-रखाव के नाम पर दो साल में 1.36 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए। जांच में इसका कोई हिसाब-किताब नहीं मिला था। डीएम की संस्तुति पर शासन ने जिला समाज कल्याण अधिकारी के बाद अब बालक और बालिका छात्रावास की अधीक्षक को भी निलंबित कर दिया है। दोनों अधीक्षकों को लखनऊ में उप निदेशक कार्यालय से संबद्ध किया गया है।
समाज कल्याण विभाग के माध्यम से संचालित यहां पर जीआईसी और मन्नापुरवा में छात्रावास हैं। इसमें तीन छात्रावास बालक और एक छात्रावास बालिका के लिए है। छात्रावास के लिए आवंटित व खर्च राशि और कराए गए कार्यों को कोई लेखाजोखा न मिलने पर डीएम ने जिला समाज कल्याण अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। जिला समाज कल्याण अधिकारी ने इसका कोई उत्तर नहीं दिया था।
छात्रावास के प्राप्त व खर्च राशि को काई हिसाब-किताब न मिलने और जिला समाज कल्याण अधिकारी की ओर से जवाब न दिए जाने पर डीएम ने शासन को कार्रवाई की संस्तुति भेजी थी।
समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम ने जिला समाज कल्याण अधिकारी राजमती के बाद बालक छात्रावास के अधीक्षक ऐश्वर्य सिंह और बालिका छात्रावास की अधीक्षक अर्चना विश्वकर्मा को भी बुधवार को निलंबित कर दिया है। जिला समाज कल्याण अधिकारी का कार्यभार देख रहीं जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी ऋचा गुप्ता ने बताया कि निलंबन आदेश प्राप्त गए हैं। छात्रावासों के कार्यों को देखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के तहत जल्द ही कर्मचारियों को नामित कराया जाएगा।
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विद्युत मद में व्यय 93.27 लाख के अभिलेख नहीं मिले
तकनीकी व डिप्टी कलक्टर की अध्यक्षता वाली समिति की जांच में स्पष्ट हुआ कि चार छात्रावासों के लिए वर्ष 2020-21, 2021-22 व 2022-23 में एक करोड़ 46 लाख 22 हजार रुपये आवंटित हुए थे। इसमें से एक करोड़ 36 लाख 39 हजार 65 रुपये खर्च दर्शाए गए। विद्युत मद में 93 लाख 27 हजार रुपये व आउटसोर्सिंग मद में 10 लाख 96 हजार 556 रुपये का उपभोग दिखाया गया। विद्युत मद में 12 लाख क आवंटन हुआ था। समिति को विभाग की ओर से प्राप्त कराई गई पत्रावली में छात्रावासों के विद्युत बिल भुगतान के लिए 66.60 लाख की मांग शासन से किए जाने का पत्र मिला, जबकि विद्युत मद में व्यय 93.27 लाख के कोई अभिलेख नहीं मिले थे।