हरदोई। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला महिला अस्पताल में बने प्राइवेट वार्ड में रहकर इलाज कराना अब आसान नहीं है। दरअसल, मार्च से प्राइवेट वार्ड का चार्ज 15 गुना बढ़ने से मरीज वार्डों में जाने से कतराने लगे हैं। पहले एक वार्ड में दो दिन के लिए 177 रुपये का चार्ज देना पड़ता था, अब एक दिन के लिए मरीज को 1320 रुपये चुकता करने पड़ रहे हैं।
जिला महिला अस्पताल में सात प्राइवेट वार्ड हैं। इसमें दो एसी व पांच कूलर वाले वार्ड हैं। प्राइवेट वार्ड में भर्ती मरीज को पहले दो दिन का 177 रुपये चार्ज के रूप में देने पड़ते थे। मार्च से मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य के निर्देशानुसार अब एक वार्ड में भर्ती ऑपरेशन वाले मरीज को एक दिन का 1320 रुपये देने पड़ रहे हैं।
वहीं, सर्दी, जुकाम और बुखार के मरीजों से दो दिन के लिए सामान्य कमरे का चार्ज 394 रुपये देना पड़ रहा है। इस तरह से इन मरीजों को कम से कम पांच दिन रहना पड़ता है। ऐसे में उन्हें 1856 रुपये देने पड़ रहे हैं। इसका असर यह हुआ कि प्राइवेट वार्डों से मरीजों का मोह दूर हो गया है। अब वे सामान्य कमरों में ही रहकर अपना इलाज कराना उचित समझ रहे हैं।
ऑपरेशन के लिए भर्ती मरीजों का चार्ज इसलिए अधिक कर दिया गया है कि उन्हें डॉक्टर कई देखने के लिए आते हैं। कई प्रकार से दवाओं के साथ अन्य बेहतर चिकित्सकीय सुविधाएं देने की बात कही जा रही है। इसका असर यह हुआ है कि प्राइवेट वार्डों में ताला लग गया है। और यहां पर कर्मचारी सिर्फ ड्यूटी कर रहे हैं।
प्राइवेट वार्ड को संचालित के लिए पूर्व प्राचार्य ने कराया था कब्जा मुक्त
जिन प्राइवेट वार्ड में इन दिनों फिर से ताला लटकने लगा है। इन्हीं वार्डों में पहले स्वास्थ्य विभाग के ही कर्मचारियों का कब्जा था। मरीज यहां पर भर्ती नहीं हो पा रहे थे। इस मामले में तत्कालीन डीएम व तत्कालीन मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य के प्रयासों से वार्डों को कब्जा मुक्त कराया गया था और यहां पर मरीजों को इलाज मिलना शुरू हुआ था। अब फिर से पुराने जैसे हालात हो चुके हैं।
शासन से यह हुए थे निर्देश
मेडिकल कॉलेज से जब जिला महिला अस्पताल संबद्ध हुआ था तो शासन की ओर से निर्देशित किया गया था कि तीन साल तक सभी व्यवस्थाएं यथा स्थिति चलेंगी। जैसे कि पूर्व में स्वास्थ्य विभाग की ओर से चल रही हैं। अभी तीन साल पूरे न होने के बावजूद भी प्राइवेट वार्ड का शुल्क बढ़ाया जाना अपने आप में चर्चा का विषय बना हुआ है।
अभी मुझे यहां आए हुए कुछ दिन ही हुए हैं। इस संदर्भ में प्राचार्य से बात करके उचित समाधान निकालने की कोशिश करेंगे।
- डॉ. रोताश, सीएमएस जिला महिला अस्पताल