फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Hardoi News: गलत वरासत के आदेश करने पर एसडीएम पर कार्रवाई की संस्तुति

Wed, 01 Mar 2023 11:51 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई
विज्ञापन
विज्ञापन
गलत वरासत के आदेश करने पर एसडीएम पर कार्रवाई की संस्तुति
विज्ञापन

- संडीला के तहसीलदार रहते हुए 2016 में किया था आदेश, वर्तमान में आजमगढ़ में हैं तैनात
- डीएम ने जांच में दोषी पाए जाने पर शासन को भेजी रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। वर्ष 2016 में जीवित किसान को मृत मानकर दूसरे के नाम वरासत करने का आदेश देने वाले तत्कालीन संडीला तहसीलदार दोषी साबित हुए हैं। जिलाधिकारी ने पूरे प्रकरण की जांच में उस समय तैनात रहे तहसीलदार को दोषी मानते हुए शासन से विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की है।
संडीला क्षेत्र के लोन्हारा के मजरा सुजानपुर निवासी सरदार के खेत की फर्जी वरासत गांव के ही रहीश ने करा ली थी। इस फर्जीवाड़े में उसने सरदार के पिता मिठ्ठन के नाम का सहारा लिया। खेत को पहले अपनी चाची मजीदा और फिर उनकी मौत के बाद अपने नाम से वरासत के आधार पर दर्ज करा लिया था। खेत के वास्तविक मालिक सरदार अभी भी जीवित हैं। किसान सरदार ने जनवरी में शिकायत दर्ज कराते हुए डीएम से न्याय की गुहार लगाई थी।
विज्ञापन

डीएम मंगला प्रसाद सिंह ने बताया कि संडीला एसडीएम से पूरे प्रकरण की जांच कराई। जांच में तत्कालीन तहसीलदार सुरेंद्र नाथ त्रिपाठी पर आरोपों की पुष्टि हुई। इस पर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति शासन से डीएम ने की है। बताया कि गया कि सुरेंद्र नाथ त्रिपाठी इन दिनों आजमगढ़ में एसडीएम के पद पर तैनात हैं।
विज्ञापन

इस प्रकार से है प्रकरण
लोन्हारा के मजरा सुजानपुर निवासी सरदार पुत्र मिठ्ठन का गांव में खेत है। इसी गांव में मजीदा पत्नी मिठ्ठन भी रहती थी। मजीदा के भतीजे रहीश ने मिठ्ठन नाम को अपने फर्जीवाड़ा का आधार बनाया। किसान सरदार ने बताया कि रहीश ने सरकारी योजना का लाभ दिलाने के नाम पर उसकी खतौनी ले ली। इसी के बाद रहीश ने सरकार को उसे मृत दर्शाकर मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया और मजीदा को सरदार के खेत के वारिश के रूप में खड़ा कर दिया। सरकारी व्यवस्था में अपनी पैठ बनाते हुए रहीश ने सरदार के खेत की मजीदा के नाम पर वरासत करा ली। जांच में खुलासा हुआ कि कुछ दिन बाद मजीदा की मौत हो गई और रहीश ने खुद को मजीदा का वारिश बताते हुए तहसीलदार न्यायालय में वाद दायर किया। 25 अगस्त 2016 को तहसीलदार न्यायालय से रहीश के पक्ष में वरासत दर्ज करने का आदेश पारित हो गया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें