थाना क्षेत्र के गांव बहरावद में रहने वाले रामस्वरूप अपने कारनामे से वर्षों से लोगों के बीच में चर्चित हैं। तीस साल से रामस्वरूप घरों व अन्य जगहों पर निकलने वाले सांपों को सुरक्षित स्थान जंगलों में छोड़ रहे हैं। आए दिन सांपों को पकड़कर जंगलों में छोड़ना उनकी दिनचर्या में शामिल हो चुका है।
गांव बहरावद निवासी 70 वर्षीय रामस्वरूप सेना की आयुध कोर से 1993 से सेवानिवृत्त हुए थे। शुक्रवार को वह पूर्व सैनिकों के लिए संचालित स्वास्थ्य योजना ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक, अलीगढ़ में दवा लेने आए थे। उनके पास दो सांप भी थे। जिनमें एक कोबरा व एक घोड़ा पछाड़ था। यहां उन्होंने बताया कि सांपों से डरें नहीं, यह हमारे मित्र हैं। ये पृथ्वी के संतुलन के लिए उपयोगी जीव हैं। किसानों के भी मित्र होते हैं। फसलों में नुकसान पहुंचाने वाले जीवों का सफाया करते हैं। उन्होंने बताया कि अधिकतर सांप जहरीले नहीं होते हैं। यह बहुत डरपोक जीव होता है। जो कभी पहले से हमला नहीं करता। उन्होंने लोगों को सांप को पकड़ने के तरीके भी बताए। बताया कि वह तीस सालों से निशुल्क घरों व अन्य जगहों पर निकल आने वाले सांपों को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ देते हैं। रामस्वरूप ने कर्नल संजीव कुमार वार्ष्णेय के साथ पूर्व सैनिकों के परिजनों को सांपों से न डरने के लिए प्रेरित किया।