हरदोई। नुमाइश मैदान में रामलीला पंडाल में शनिवार की रात हुए कवि सम्मेलन में कवियों ने समा बांध दिया। रामलीला कवियों ने देशभक्ति से प्रेरित वीर रस की कविताओं को प्रस्तुत कर श्रोताओं में देश प्रेम की अलख जगाई तो हास्य रस के कवियों की रचनाओं पर जमकर तालियां बजीं।
कवि सम्मेलन की शुरूआत जिला जज हरवीर सिंह ने स्वर्गीय हरी बहादुर श्रीवास्तव को श्रद्धासुमन अर्पित किया। मैहर की मधु माधवी ने सुनाया कि पाप को पुण्य में भुगतान की आदत है मुझे, यानि हर दर्द के सम्मान की आदत है मुझे, तुमको अमृत ही मुबारक मै जहर पी लूंगी, मै तो मीरा हूं गरल पान की आदत है मुझे। नवोदित कवि 14 वर्षीय सिद्धार्थ ने मंच पर अपनी रचना को सुनाकर आज के हालातों को बयां कर दिया।
संचालन करते हुए फर्रुखाबाद से आए कवि ने सुनाया कि फाकों को भी मस्ती में जीते हैं बस्ती-बस्ती फरियाद नहीं करते, सच कहते है अथवा चुप रहते हैं, हम लफ्जों को बर्बाद नहीं करते सुनाकर तालियां बटोरी। सहारनपुर के डा. राजेंद्र राजन ने सुनाया कि आंसुओं को संभालकर रखना, खुशबुओं को संभालकर रखना, वक्त पूछेगा जिंदगी क्या है कुछ लम्हों को संभाल कर रखना।
दिल्ली के श्याम बंधु ने सुनाया कि अपने ही घर में अजनबी लगती है जिंदगी, खोयी हुई दादी सी भटकती है जिंदगी, चीखे सुनेगा कौन इन बहरों के शहर में गुमनाम बहनों की तरह लुटती है जिंदगी। पानीपत के योगेंद्र मौदगिल ने सुनाया कि भ्रष्ट राजनीति हुई चौपट हुआ समाज, हर बानर को चाहिए किष्किंधा का राज। लखनऊ की सुफलता त्रिपाठी ने बताया कि मै तेरी प्रीति में बावरी हो गई, श्याम मन में बसी सांवरी हो गई, तुमने हाथों से थामा मुझे नेह से, मैं अधर पे धरी बांसुरी हो गई।