हरदोई। एक पंचायत सचिव ने मानदेय भुगतान के नाम पर प्रधान से ओटीपी पूछकर बिना खरीदारी के ही दो फर्मों को भुगतान कर दिया। मानदेय भुगतान के लिए पंचायत सचिव ने प्रधान से डिजिटल सिग्नेचर सर्टीफिकेट (डीएससी) भी लिया और इसके बाद मनमाने ढंग से भुगतान कर दिए।
गांवों में विकास कार्य और खरीदारी आदि के भुगतान की जिम्मेदारी प्रधान और पंचायत सचिव को सौंपी गई है। ताजा मामला विकास खंड टड़ियावां की ग्राम पंचायत अलीनगर का है। अलीनगर में पंचायत सचिव के पद पर नवंबर 2023 से रजनीश वर्मा तैनात हैं। प्रधान सोनिया शुक्ला का आरोप है कि सचिव पंचायत सचिवालय में नहीं आते हैं। सरकारी कंप्यूटर आदि उठा ले गए हैं। अपने घर से ही भुगतान की प्रक्रिया करते हैं। वर्मा इंटरप्राइजेज फर्म को 74000 रुपये का भुगतान किया गया है, जबकि इस फर्म से ग्राम पंचायत की ओर से न तो कोई खरीदारी की गई और न ही कोई काम कराया गया है।
पशु आश्रय स्थल के संरक्षित मवेशियों के लिए भूसा, चारा-दाना आदि की आपूर्ति संडीला की फर्म गोविंद गुप्ता से की जा रही है। आरोप है कि पंचायत सचिव ने इसका भुगतान भी किसी दूसरी फर्म को 1,83,000 रुपये का किया है। प्रधान ने डीएम से मिलकर इसकी शिकायत कर जांच कराने की मांग की है। कहा है कि जांच में और भी कई फर्जी भुगतान पकड़ में आ जाएंगे।
कोट-
पंचायत रजनीश वर्मा करीब एक साल से पंचायत में तैनात हैं। पंचायत कार्यालय पर आते ही नहीं हैं। मानदेय के भुगतान के बहाने से डीएससी ले ली थी और इसके बाद ओटीपी भी पूछ लिया, लेकिन, जब मोबाइल पर संदेश आया, तब पता चला की भुगतान तो किसी वर्मा इंटरप्राइजेज और एक अन्य फर्म को किया गया है। गांव में न आने से ग्रामीणों को अपने कामों के लिए परेशान होना पड़ता है और वह हमारे पास आते हैं। शासकीय राशि के दुरुपयोग और गबन की शिकायत दर्ज कराई है।
- सोनिया शुक्ला, प्रधान, अलीनगर
प्रकरण संज्ञान में है। प्रधान ने खुद शिकायत दर्ज कराई है। डीएम ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। पूरे मामले में कार्रवाई शुरू की गई और तथ्य, साक्ष्य भी जुटाए जा रहे हैं। गेट-वे से भुगतान के स्थान पर ई-ग्राम स्वराज पर सीधा भुगतान किए जाने, डीएससी लेने व फर्म को भुगतान के संबंध में पंचायत सचिव रजनीश वर्मा को नोटिस जारी किया गया है। जवाब आने पर परीक्षण के बाद कार्रवाई तय की जाएगी।
विनय कुमार सिंह, डीपीआरओ