हरदोई। मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मरीजों काे नहीं मिल पा रहा है। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा सिर्फ शोपीस बनकर रह गई है।
पुरूष चिकित्सालय में मशीन है, लेकिन टेक्नीशियन नहीं है, जबकि महिला चिकित्सालय में भी अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाते हैं। चिकित्सक के मेडिकोलीगल के मामले में व्यस्त रहने के कारण गर्भवती महिलाओं को बाहर से ही अल्ट्रासाउंड कराने के लिए मजबूर होना पड़ता है। अल्ट्रासाउंड की समुचित व्यवस्थाएं करने के लिए फिलहाल तो कई व्यवस्था होते नहीं दिख रही है।
जिले की स्वास्थ्य सेवाएं जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते दम तोड़ती हुई नजर आ रही हैं। मरीजों को मिलने वाली सहूलियत जिम्मेदारों की बेपरवाही के चलते उन्हें नहीं मिल पाती है। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध पुरूष और महिला चिकित्सालय में अल्ट्रासाउंड कराने की सहूलियत है, लेकिन दोनों ही स्थानों से मरीजों का अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहा है। पुरूष चिकित्सालय में मशीन होने के बावजूद अभी तक चिकित्सक और टेक्नीशियन की भर्ती नहीं की गई।
वहीं, महिला चिकित्सालय में मशीन और चिकित्सक दोनों होने के बावजूद महिलाओं के नियमित अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहे हैं। महिला चिकित्सालय में अल्ट्रासाउंड करने के लिए डॉ. अरूण कुमार को जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन वह सिर्फ मेडिकोलीगल के अल्ट्रासाउंड तक ही सीमित रह पाते हैं। अन्य जिलों में जाने की वजह से वह नियमित समय नहीं दे पा रहे हैं।
बुधवार को भी सिर्फ हुए तीन मेडिकोलीगल
हरदोई। महिला चिकित्सालय में अल्ट्रासांउड अब सिर्फ मेडिकोलीगल तक ही सीमित होकर रह गया। बुधवार को भी डॉ.अरूण कुमार सिर्फ तीन मेडिकोलीगल के अल्ट्रासाउंड कर उन्नाव के लिए मेडिकोलीगल के मामले में चले गए, जबकि अल्ट्रासाउंड कराने के लिए कई महिलाएं अपनी बारी का इंतजार करती रहीं। इन्होंने बाद में बाहर से अल्ट्रासाउंड कराया।
शहर कोतवाली के सांडी चुंगी निवासी गुलफशा ने बताया कि वह तीसरी बार आई हैं, लेकिन उसका अल्ट्रासाउंड चिकित्सालय में नहीं हो पाया है। जबकि बाहर से अल्ट्रासाउंड कराने पर एक बार में 500 रुपये पड़ते हैं। बताया कि इस बार चिकित्सक ने उसे जो अल्ट्रासाउंड लिखा है, उसकी कीमत बाहर 1,500 रुपये बताई गई। इस वजह से उसे आना पड़ा, लेकिन आज भी चिकित्सक नहीं मिले।
अल्ट्रासाउंड मशीन तो दोनों जगह है, लेकिन शासन स्तर से ही पुरूष चिकित्सालय में चिकित्सक और टेक्नीशियन नहीं दिए गए हैं और महिला चिकित्सालय के चिकित्सक पर मेडिकोलीगल का भी भार है। इनको दूसरे जिलों में भी जाना पड़ता है। इस वजह से समस्याएं आ रही हैं। -डॉ. आर्य देश दीपक, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज