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Hardoi News: क्षेत्र पंचायतों के कार्याें की जांच करने में कांप रहे अफसर

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आनंद मिश्रा
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हरदोई। क्षेत्र पंचायतों के प्रमुखों के रसूख के आगे जांच के लिए नामित किए गए अफसर कंपकपा रहे हैं। डीएम के आदेश के बाद भी तीन क्षेत्र पंचायतों में से एक के भी कार्याें की न तो जांच हो पाई और न ही सत्यापन। हद तो यह है कि एक जांच अफसर को ब्लाॅक के जिम्मेदारों ने दो बार पत्र भेजने के बाद भी अभिलेख ही उपलब्ध नहीं कराए। कुल मिलाकर पहले क्षेत्र पंचायतों के खर्च का ब्योरा देने में अफसरों के हाथ कांप रहे थे और अब हकीकत परखने से अफसर बच रहे हैं।
सभी क्षेत्र पंचायतों को 15वें वित्त और राज्य वित्त के तहत विकास कार्य कराने के लिए बड़े पैमाने पर बजट उपलब्ध कराया जाता है। आमतौर पर देखा जाता है कि इस बजट से ब्लाॅक प्रमुख और खंड विकास अधिकारी की जोड़ी विकास कार्य कराने का जिम्मा अपने चहेतों को ही सौंप देते हैं। यही वजह है कि इस बजट से कराए जाने वाले कार्याें की कभी जांच नहीं कराई जाती।
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डीएम मंंगला प्रसाद सिंह ने जून में एक पत्र जारी कर सभी क्षेत्र पचायतों के वर्ष 2022-23 में खर्च किए गए बजट और कराए गए कार्याें का ब्योरा तलब किया था। ब्योरा तलब करते ही ब्लाक प्रमुखों, खंड विकास अधिकारियों और लेखाकारों के साथ ही चहेते ठेकेदारों में भी खलबली मच गई थी। बामुश्किल कापते हुए हाथों से क्षेत्र पंचायत के खर्च का ब्योरा डीएम को सौंपा गया था।
इसके बाद 22 जुलाई को डीएम ने बावन, हरियावां और संडीला क्षेत्र पंचायत से वित्तीय वर्ष 2022-23 में कराए गए कार्याें की जांच कराने का निर्णय लिया था। तीन जांच कमेटी गठित कर 15 दिन में सत्यापन के साथ आख्या मांगी गई थी। 15 दिन की जगह 65 दिन बीत गए, लेकिन जांच रिपोर्ट छोड़िए अभी तक अफसर जांच करने के लिए ही नहीं गए।

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यह बनी थी जांच कमेटी
डीएम ने तीन जांच कमेटी बनाई थीं। बावन क्षेत्र पंचायत के कार्याें के लिए जिला ववाकस अधिकारी की अध्यक्षता में दो सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी। हरियावां के लिए ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक गजेंद्र तिवारी के नेतृत्व में जांच कमेटी गठित हुई थी, जबकि संडीला के कार्याें के लिए उपायुक्त मनरेगा रवि प्रकाश सिंह की अध्यक्षता में कमेटी बनी थी। तीन में से किसी भी कमेटी ने अब तक जांच की शुरूआत ही नहीं की है।

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इसलिए जांच से बच रहें हैं अफसर
तीनों ही ब्लाॅक प्रमुख सत्ताधारी दल से जुड़े हुए हैं। तीनों ही क्षेत्र पंचायतों में कराए गए कार्याें में नियमों को तोड़ा गया है और इसके पर्याप्त साक्ष्य भी संवाद न्यूज एजेंसी के पास हैं। यही वजह है कि अफसर जांच से कतरा रहे हैं। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि बावन क्षेत्र पंचायत ने वर्ष 2022-23 मेेंं पांच करोड़ 27 लाख रुपये, संडीला क्षेत्र पंचायत में दो करोड़ 49 लाख रुपये और हरियावां क्षेत्र पंचायत में एक करोड़ 32 लाख रुपये से अधिक खर्च किए हैं।

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यह रही एक बानगी
क्षेत्र पंचायतों में विकास कार्य कराने के नाम पर जमकर मनमानी हुई। चहेतों को उपकृत करने के लिए क्षेत्र पंचायत के बजट का इस्तेमाल किया गया। हरियावां क्षेत्र पंचायत से 75 बिलों के सापेक्ष 34 बिलों का भुगतान एक ही फर्म (ठेकेदार) को किया गया। यहां कुल भुगतान एक करोड़ 32 लाख रुपये किया गया है, जिसमें से अधिकांश भुगतान एक ही ठेकेदार को हुआ है।
खंड विकास अधिकारी, ब्लाॅक प्रमुख और लेखाकार की तिकड़ी की मिलीभगत से ही यह संभव है कि हर बार टेंडर निकलने पर एक ही शख्स काे काम मिल जाए। हरियावां क्षेत्र पंचायत से हिंगुआपुर में स्थित एक तालाब का सौंदर्यीकरण और जीर्णोद्धार कराने के नाम पर तकरीबन नौ लाख रुपये खर्च किए गए, लेकिन तालाब का काम फिर भी पूरा नहीं हो पाया।

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जांच अफसरों की सुनिए
- हमको क्षेत्र पंचायत के कार्याें के अभिलेख ही नहीं मिले। दो बार रिमाइंडर भेज चुके हैं, जब अभिलेख नहीं मिलेंगे तो जांच क्या करेंगे। अभिलेख मिलते ही जांच कर रिपोर्ट डीएम को देंगे।
अरविंद कुमार, जांच अधिकारी बावन

- इतने काम आ जाते हैं कि जांच के लिए समय ही नहीं मिल पाता। कभी आवासीय योजनाओं में उलझ जाते हैं तो कभी निधि के कार्याें की मॉनीटरिंग में। कोशिश करके जल्दी ही जांच करेंगे।
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गजेंद्र तिवारी, जांच अधिकारी हरियावां

- हां जांच तो नहीं कर पाए। व्यस्तता बहुत थी। मनरेगा में भी बहुत काम होता है। अगले माह जरूर से मौके पर जाकर कार्याें का सत्यापन और जांच कर लेंगे। फिर रिपोर्ट डीएम को देंगे।
रवि प्रकाश सिंह, जांच अधिकारी संडीला
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