हरदोई। सरकारी अस्पतालों में रेडियोलॉजिस्ट न होने से मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। महिला अस्पताल में संविदा पर तैनात रेडियोलॉजिस्ट के कंधों पर 200 मरीजों के अल्ट्रासाउंड का बोझ है। डॉक्टर सिर्फ एक घंटे जांच करते हैं। इसके बाद मरीजों को तारीख देकर लौटा दिया जाता है। ऐसे में लोग 500 से 600 रुपये खर्च कर निजी सेंटरों पर जांच कराने को मजबूर हैं।
जिले में 30 सीएचसी और 69 पीएचसी संचालित हैं।
इसके अलावा मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल और महिला अस्पताल हैं। एक 100 शैया संयुक्त चिकित्सालय भी है। हाल ये है कि किसी भी अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट नहीं हैं। इसके कारण मरीज दर्द से कराहते रहते हैं और उनका अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाता है। सूत्रों के मुताबिक डॉक्टर सिर्फ 40 से 45 अल्ट्रासाउंड करते हैं। अन्य मरीजों को जांच के लिए चार-पांच दिन बाद की तारीख दे दी जाती है।
ये है स्थिति
महिला अस्पताल में दोपहर एक बजे डॉक्टर अल्ट्रासाउंड कक्ष में आते हैं। सिर्फ एक घंटे जांच करते हैं। दो बजते ही जांच बंद हो जाती है। कर्मचारी अगले दिन आने की बात कहकर मरीजों को चलता कर देते हैं। दिन भर अल्ट्रासाउंड के लिए भटकते मरीज शाम को बिना जांच के तारीख लेकर चले जाते हैं।
महिला अस्पताल में संविदा पर तैनात एक रेडियोलॉजिस्ट से जैसे-तैसे जांचें कराई जा रहीं हैं। इसके कारण दिक्कतें हो रहीं हैं। - डॉ. विनीता चतुर्वेदी, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल
दो दिन नहीं आए डॉक्टर
शाहाबाद ब्लॉक के बिलहारी गांव निवासी गुड़िया ने बताया कि उनके पेट में दर्द हो रहा था। पांच दिन पहले उसने जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. विवेक वर्मा को दिखाया था। डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड लिखा था। वह उसी दिन महिला अस्पताल के अल्ट्रासाउंड कक्ष में पर्चा जमा करके आईं। दो दिन डॉक्टर नहीं आए। शनिवार को फिर जांच कराने गईं तो अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर मरीजों की कतार लगी मिली।