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Hardoi News: आयुष विंग में दवा नहीं, अधिकारी को जिम्मेदारी का पता नहीं

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संवाद न्यूज एजेंसी
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हरदोई। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और ऐलोपैथिक से इतर देसी पद्धति (होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक व यूनानी) आयुष को बढ़ावा देने की कवायद धड़ाम हो गई है। लगभग सात वर्ष पहले खोली गई आयुष विंग में पिछले डेढ़ साल से अधिकांश दवाएं नहीं हैं। ऐसे में आयुष विंग में परामर्श तो मिलता है, लेकिन दवा नहीं मिल पाती। हैरानी की बात तो यह है कि सीएमओ को इस बात की जानकारी भी नहीं है कि आयुष विंग उनके आधीन आता है।
जिला अस्पताल परिसर में सात साल पहले आयुष विंग की स्थापना हुई थी। यहां होम्योपैथी, आयुर्वेद और यूनानी पद्धति से उपचार किया जाता है। होम्योपैथी के लिए डा. रमेश चंद्र, यूनानी के लिए डा. नौशाद और आयुर्वेद के लिए डा. मनीष सिंह की तैनाती है। तीनों ही चिकित्सक आयुष विंग में नियमित बैठते भी हैं, लेकिन अब यह मरीजों को परामर्श देने तक ही सीमित रह गए हैं।
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दरअसल पिछले डेढ़ साल से यूनानी और आयुर्वेद की कोई भी दवा आयुष विंग में नहीं है। होम्योपैथी की गिनी-चुनी दवाएं ही आयुष विंग में हैं। ऐसे में यह चिकित्सक मरीजों को परामर्श दे देते हैं, लेकिन दवा नहीं उपलब्ध करा पाते। पिछले डेढ़ साल में दवाइयाें का टोटा होने को लेकर तीन बार जिम्मेदारों को पत्र भेजा जा चुका है, लेकिन नतीजा सिफर है।
हर रोज आते हैं औसतन 105 मरीज
आयुष विंग में औसतन हर रोज 105 मरीज यहां के चिकित्सकों के पास आते हैं। 30 से 40 मरीज यूनानी के चिकित्सक के पास आते हैं। इसी तरह 25 से 30 मरीज होम्योपैथिक के और 30 से 35 मरीज आयुर्वेदिक चिकित्सक के पास भी जाते हैं।
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वर्जन
- आयुष विंग भले ही जिला अस्पताल में संचालित हो, लेकिन इसकी जिम्मेदारी सीएमओ की है। दवाओं से लेकर अन्य व्यवस्थाएं भी सीएमओ को ही करनी होती हैं। वही कुछ कर पाएंगे।

डा. जेके वर्मा
सीएमएस


- मेरी जानकारी में तो ऐसे कोई विंग मेरे अधीन नहीं है। अब आप बता रहे हैं तो पता करा लेंगे। अगर हमारे अधीन होगी, तो जल्द से जल्द दवाएं उपलब्ध कराएंगे।
डा. रोहताश कुमार

सीएमओ
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