हरदोई। नए शिक्षा सत्र के पहले ही दिन विद्यार्थियों के हाथों में नई किताबें पहुंचाने की शासन की मंशा पर बेसिक शिक्षा विभाग के स्थानीय जिम्मेदारों ने पानी फेर दिया। जनपद में संचालित 3446 परिषदीय विद्यालयों के चार लाख से अधिक विद्यार्थियों के लिए शासन से किताबें तो आ गईं, लेकिन स्कूलों तक नहीं पहुंच पाईं।
दरअसल किताबों की पहली खेप आने के बाद भी ढुलाई का टेंडर न होने की वजह से नए शिक्षा सत्र के पहले ही दिन किताबें विद्यार्थियों के हाथों तक नहीं पहुंच पाईं। कुछ विद्यालयों में पुरानी किताबें बच्चों को देकर औपचारिकता जरूर पूरी की गईं।
जनपद में संचालित परिषदीय विद्यालयों में 4,39,245 विद्यार्थी हैं। कॉन्वेंट स्कूलों की तर्ज पर पिछले कुछ वर्ष से परिषदीय विद्यालयों का शिक्षा सत्र भी एक अप्रैल से ही शुरू कर दिया जाता है। परिषदीय विद्यालयों के विद्यार्थियों काे यूनिफार्म की तरह ही पुस्तकें भी शासन से निशुल्क मिलती हैं।
किताबों की खरीद शासन स्तर से होने के बाद जनपद को विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर आवंटित कर दी जाती हैं। हरदोई जनपद में अब तक तकरीबन 30 लाख किताबें आ चुकी हैं, लेकिन यह किताबें प्राथमिक विद्यालय चित्तरपुरवा और संविलियन विद्यालय कांशीराम कॉलोनी में डंप हैं।
नए शिक्षा सत्र से पहले शासन ने तो किताबें दे दीं, लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग के जिम्मेदारों ने आगे की प्रक्रिया पूरी ही नहीं की। दरअसल जिला मुख्यालय से ब्लॉक संसाधन केंद्रों और वहां से विद्यालयों तक किताबों को पहुंचाने के लिए ढुलाई का टेंडर होता है। विभागीय अधिकारियों ने पहले टेंडर की प्रक्रिया पूरी नहीं की और अब चुनाव की आचार संहिता के चलते टेंडर प्रक्रिया हो नहीं सकती। कुल मिलाकर बेसिक शिक्षा विभाग के जिम्मेदारों की लापरवाही का खामियाजा विद्यार्थियों को ही भुगतना पड़ेगा।
15 फरवरी को आ गई थी पहली खेप
शासन से मिलने वाली पुस्तकों की ढुलाई का टेंडर हर वर्ष होता है। 15 फरवरी को शासन से किताबों की पहली खेप मिल गई थी, लेकिन यहां के जिम्मेदार अफसरों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। अगर तभी टेंडर प्रक्रिया शुरू कर ली जाती तो नए सत्र के पहले ही दिन से सभी विद्यालयों तक नई पुस्तकें पहुंच जातीं।
चुनाव आचार संहिता के कारण टेंडर प्रक्रिया नहीं हो पाई है। निर्वाचन आयोग की दर के आधार पर भाड़ा देकर किताबों को सत्यापन के बाद बीआरसी पर भेजने की व्यवस्था की जा रही है। वहां से खंड शिक्षा अधिकारी किताबें विद्यालयों को भिजवाएंगे।
विजय प्रताप सिंह, बीएसए