फोटो 22: बिलग्राम में जुलूस निकालते अकीदतमंद। संवाद
बिलग्राम। मुहर्रम पर नगर के बड़े इमामबाड़े से रविवार देर रात मेहंदी का जुलूस पूरे एहतराम, अकीदत और अनुशासन के साथ निकाला गया। जुलूस के आयोजक इशरत अब्बास रहे। यह कदीमी मेहंदी पहले मरहूम लाल मोहम्मद की सरपरस्ती में उठती थी, जिसकी परंपरा आज भी उसी श्रद्धा के साथ कायम है। जुलूस के दौरान बड़ी संख्या में लोग जियारत के लिए पहुंचे और कर्बला के शहीदों को याद कर अपनी अकीदत पेश की। जुलूस में अंजुमन बज्म-ए-अजाए हुसैन अंजुमन हैदरिया ने नोहाख्वानी और मातम के जरिए कर्बला के दर्दनाक वाकये को याद किया। अंजुमन के नोहाख्वान जनाब सज्जाद, बच्चन, अरकम बिलग्रामी, अरबाज अली, फ़राज, जैन और अली ने अपनी मकसूस और दर्दभरी आवाज में नौहे पेश किए, जिन्हें सुनकर अजादार गम-ए-हुसैन में डूब गए। पूरे रास्ते या हुसैन की सदाएं और मातम की गूंज माहौल को गमगीन बनाती रहीं। जुलूस अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ बड़े इमामबाड़े वापस आया। लगभग करीब 12:40 बजे इसका समापन हुआ। जुलूस में अंजुमन हैदरिया के वरिष्ठ दस्ता मैनेजर विरासत हुसैन अफसर अली, मिसाम जैदी, हैदर मेहंदी जैदी, इमरान समेत बड़ी संख्या में अजादार मौजूद रहे।