हरदोई। इस बार भी होली पर ट्रेनों में भारी भीड़ उमड़ रही है। महानगरों में रोजी-रोटी के लिए रहने वाले लोग होली में अपने घर जरूर आते हैं। इनमें से अधिकतर लोग ट्रेनों से ही सफर करते हैं। पंजाब, दिल्ली, हरियाणा और मुंबई से आने वाली ट्रेनों में वेटिंग 150 से 200 के पार चल रही है। 15 मार्च तक टिकट कन्फर्म नहीं हो रहे हैं। जिले के करीब 55 हजार लोगों का होली पर घर आना आसान नहीं हैं। मजबूरी में लोग बसों से घर पहुंचने की जुगत लगा रहे हैं, यही हाल यहां से जाने वालों का भी है।
जिले में 1300 से अधिक ग्राम पंचायतें हैं। एक अनुमान के मुताबिक प्रत्येक पंचायत से करीब 35 से 40 लोग नौकरी को लेकर महानगरों में रहते हैं। इस प्रकार करीब 55 हजार लोग बाहर रहते हैं। इनमें दिल्ली, पंजाब, हरियाणा आदि में रहने वालों की संख्या सबसे अधिक है। दिल्ली से हरदोई स्टेशन तक आने वाली बाघ एक्सप्रेस में पांच मार्च की स्लीपर की वेटिंग 200 तो एससी थर्ड की वेटिंग 80 है।
वैशाली एक्सप्रेस में स्लीपर की वेटिंग 127, थर्ड एसी की 107, सेकेंड एसी की 62 है। वैशाली में सात मार्च को भी स्लीपर की वेटिंग 190 तक है। पंजाब के अमृतसर से आने वाली सरयू यमुना एक्सप्रेस में होलिका दहन वाले दिन सात मार्च को स्लीपर की वेटिंग 130 है। अमृतसर एएसआर केआईआर में स्लीपर की वेटिंग 166 है। गुजरात के सूूरत से छह मार्च को आने वाली अवध एक्सप्रेस की वेटिंग 95 है।
यही हाल नौचंदी, फरक्का, गोमती एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों का है। पाली इलाके के दिनेश लुधियाना में एक निजी कपड़े की फैक्टरी में काम करते हैं। उन्होंने अपने परिजनों को बताया कि हरदोई से लेकर लखनऊ के बीच किसी भी स्टेशन का टिकट 15 मार्च तक कन्फर्म नहीं है। सूरत में रहने वाले शाहाबाद निवासी राधेलाल कहते हैं कि टिकट कन्फर्म न होने से आना मुश्किल है। दिल्ली में रहने वाले असोरा गांव के विकास मिश्र ने बताया कि ट्रेन में सीट नहीं है। बस से किसी तरह आएंगे।
होली पर बसों में भी जबरदस्त भीड़ जुटने की उम्मीद है। अभी से बस स्टेशन पर यात्रियों को घंटों बसों का इंतजार करना पड़ रहा है। सरकारी और निजी बस स्टैंड में बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुटने लगी है। लखनऊ और दिल्ली जाने के लिए भीड़भाड़ का माहौल रहा।
जैसे ही कोई बस पहुंचती है, लोग बस में चढ़ने के लिए दौड़ लगा देते। एआरएम हाकिम सिंह ने बताया कि होली के दिन भी बसों का संचालन होगा। बताया कि 70 अतिरिक्त बसें चलाई गईं हैँ।