न्यायमूर्ति ने माला पहना कर सुखमय मदांपत्य जीवन बिताने की दी शुभकामनाएं।
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। प्रधान न्यायाधीश अजय श्रीवास्तव अपर प्रधान न्यायाधीश आशारानी की अदालत में 26 जोड़े आपसी मतभेद मिटाकर साथ जीवन बिताने को तैयार हुए जिन्हें माला पहना कर कोर्ट से विदा किया गया। राष्ट्रीय लोक अदालत में .... मामलों का निस्तारण किया गया। रविवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने किया।
थाना टड़ियावां क्षेत्र के ग्राम ढपरापुर निवासी किरण पुत्री डालचंद ने 28 मार्च 2019 को न्यायालय में वाद दायर किया था। बताया था कि उनकी शादी चार मई 2017 को हुई थी। शादी के बाद से ही ससुरालीजन दहेज की मांग करने लगे थे। दहेज न दे पाने के कारण 25 जुलाई 2018 को ससुरालीजनों ने मारपीट कर घर से निकाल दिया था। इसके बाद उन्होंने न्यायालय में पति के खिलाफ मुकदमा दायर कर भरण पोषण की मांग की थी।
इसी तरह कोतवाली शहर क्षेत्र के मोहल्ला चंदीपुरवा निवासी प्रियंका पुत्री भगवान ने कोर्ट में वाद दायर किया था। बताया था कि उनकी शादी आठ अक्तूबर 2019 को हुई थी। शादी के बाद से ही ससुरालीजन छोटी-छोटी बात को लेकर घर कलह करते थे। साथ ही दहेज की मांग भी करते थे। 19 सितंबर 2021 को घर से निकाल दिया था। दोनों मुकदमों की सुनवाई प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय के यहां चल रही थी।
सुलह समझौता के लिए दोनों की तारीख राष्ट्रीय लोक अदालत में लगाई गई थी। न्यायालय में संधि पत्र दाखिल करके बताया कि दोनों पक्षों में समझौता हो गया है। उनके बीच में अब कोई विवाद नहीं है वे लोग साथ रहकर दांपत्य जीवन बिताना चाहते हैं। इसके बाद न्यायालय ने उनका संधि पत्र स्वीकार कर लिया।
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न्यायमूर्ति ने निर्णय का किया स्वागत
न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने समझौता करने वाले जोड़ों के निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सभी रिश्तों में पति-पत्नी का रिश्ता सबसे अमूल्य होता है। पति का धर्म होता है कि वह अपने पत्नी की हर संभव मदद करें। बिना सम्मान के कोई भी रिश्ता आसानी से नहीं चल पाता इसीलिए रिश्ते में सम्मान होना बेहद ही जरूरी है।