कहीं धन उगाही के चलते, तो नहीं लग गया ताला
ओटी के संचालन की जिम्मेदारी अर्थो विभाग को मिलने के बाद संबंधित मरीजों का ऑपरेशन होता है। हालांकि आर्थों के आपरेशन कम होने से इस पर ताला ही लगा रहता है। वहीं ऑपरेशन के नाम पर कई बार मरीजों से धन उगाही के मामले भी प्रकाश में आ चुके हैं। इसके अलावा इमरजेंसी की ओटी को आर्थों की ओटी बनने के बाद लोगों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
तीमारदारों की जुबानी....
कोतवाली देहात के मोहल्ला शिवपार निवासी अजय कुमार का कहना है कि उनके पड़ोस का युवक सड़क हादसे में घायल हो गया था। इलाज के लिए अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड आए। यहां ओटी में ताला लगा था। इससे स्ट्रेचर पर ही उसका इलाज हुआ।
कोतवाली शहर के चंदी पुरवा निवासी नितिन का कहना है जिला अस्पताल की ओपीडी में करीब एक सप्ताह से ताला लगा है। यहां पर हादसों के घायलों का इलाज माइनर ओटी में नहीं हो रहा है। बल्कि बरामदे में बेंच पर ही टांके लगाए जा रहे हैं।
इमरजेंसी की माइनर ओटी को अर्थो ओटी बनाया गया है। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों के लिए माइनर ओटी की जल्द व्यवस्था की जाएगी। नया भवन मिलने वाला है। इसके बाद यह परेशानी दूर हो जाएगी। -डॉ. जेएन तिवारी, सीएमएस जिला अस्पताल