पिहानी। नातिया मुशायरा में हुजूर मोहम्मद साहब और सहाबा-ए-कराम की शान में नात और मनकबत पढ़कर शायरों ने वाहवाही लूटी। सज्जाद आजम लखीमपुरी ने नात पढ़ी-कलमा जुबां पे आ गया तलवार गिर गई, देखा उमर ने जिस घड़ी चेहरा हुजूर का।
संचालक जलीस दिलकश ने पढ़ा कि इख़्तिलाफ आपस के आओ सब मिटा डालें, नफरतों की तहरीरें आग में जला डालें। फहीम लालापूरी ने कहा कि बरकत कुछ ऐसी दूध के प्याले में आ गई, आका ने खुद भी पी लिया, सबको पिला दिया। शायर यहया जलीस ने आपसी मतभेद दूर करने पर जोर देकर कहा कि इस दौर में क्या आप सहाबा से बड़े हो, देवबंदी- बरेलवी के झमेलों में पड़े हो।
स्थानीय शायरों साकिब जकरिया, फुजेल खान, हाफिज जुबेर व हुजैफा राभा आदि ने भी कलाम पेश किया।
इससे पहले दीनी तालीमी खिदमात अंजाम देने वाले मरहूम हाफिज मरगूब की याद में शुक्रवार रात जलसे व नातिया मुशायरे का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता मौलाना इस्लाम उल हक असजद कासमी ने कुरान और हदीस की रोशनी में समाज सुधार के तरीके बताए।
मदरसा मोहम्मदिया मोहम्मदी के प्रबंधक व जमीयत उलेमा लखीमपुर के जिलाध्यक्ष मौलाना असजद ने कहा कि इस्लामी शिक्षाओं से दूरी बना कर हम सब अपनी दुनिया-आखिरत बर्बाद कर रहे हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत कारी असमुर्रहमान रसूलपूरी ने तिलावत ए कुरान से की। मुख्य अतिथि सैफ सईद खान समेत डा. अंजर हुसैन खां, फैजी सिद्दीकी, उस्मान कुरैशी, सोहेल, उस्मान कुरैशी, खालिद व आफताब आदि मौजूद ने मौजूद रहे।