हरदोई। 52 वर्षीय किसान को खुद को जीवित साबित करने में नौ साल से अधिक का समय लग गया। किसान के जीवित रहते हुए राजस्व विभाग के अधिकारियों ने मृत दर्शाकर उनकी जमीन की वरासत दर्ज कर दी। इससे किसान जमीन जाने के साथ ही खुद को जीवित साबित करने के लिए किसान ने लड़ाई जारी रखी और जीत हासिल हुई।
तहसील शाहाबाद व थाना व ब्लॉक पिहानी क्षेत्र के कोटरा निवासी कृष्ण पाल सिंह को मृत दिखाकर चार गाटा की करीब 24-25 बीघा भूमि पर वरासत दर्ज कर दी गई है। जीवित होते हुए वरासत दर्ज होने पर पीड़ित किसान ने शिकायत दर्ज कराई। कोटरा चकबंदी प्रक्रिया में होने के कारण उप संचालक चकबंदी से जांच कराई गई। जांच में खतौनी सन 1414-1419 फसली में कृष्ण पाल सिंह का नाम दर्ज मिला, जबकि एक अन्य खाता में फरवरी 2015 में शाहाबाद तहसीलदार की ओर से आदेश पारित कर कृष्ण पाल सिंह का नाम निरस्त किया गया है।
उप संचालक चकबंदी ने दी रिपोर्ट में कहा है कि कृष्ण पाल सिंह जीवित हैं। शाहाबाद में उस समय तैनात रहे तहसीलदार ने गलत ढंग से आदेश पारित किया है। पीड़ित कृष्ण पाल सिंह ने बताया कि तहसीलदार ने उनके जीवित रहते हुए चचेरे भाई उदय पाल सिंह व सुरेश सिंह के नाम वरासत दर्ज की गई है।
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पिहानी के कोटरा निवासी किसान कृष्ण पाल सिंह के शिकायती पत्र पर गहराई से जांच कराई गई तो शाहाबाद में वर्ष 2015 में तैनात रहे तहसीलदार ने न केवल नियम, शासनादेश और परिषद की व्यवस्था के विरुद्ध कार्य किया, बल्कि आपराधिक कृत्य भी किया है। तत्कालीन तहसीलदार के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए राजस्व परिषद को संस्तुति भेजी जाएगी और एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। वास्तविक किसान का नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज करने के भी आदेश दिए गए हैं।
मंगला प्रसाद सिंह, जिलाधिकारी