संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। कागजों पर ही काम दिखाकर भुगतान निकाल लेने का नया मामला सामने आया है। संडीला विकास खंड की ग्राम पंचायत जामू और किन्हौटी में इंटरलॉकिंग रोड बनवाए बिना ही भुगतान निकाल लिया गया। इतना ही नहीं बड़ी संख्या में सिटीजन इंफार्मेशन बोर्ड (सीआईबी) लगवाए बिना ही इसका भी भुगतान निकाल लेने की पुष्टि हुई है।
संडीला के जामू और किन्हौटी में करीब 20 कार्यों पर सीआईबी नहीं लगवाए गए हैं। किन्हौटी में करीब छह लाख की लागत वाली इंटरलॉकिंग का काम भी नहीं कराया गया है। इन कार्यों का भुगतान निकाल दिया गया। बताया गया कि सीआईबी आपूर्ति का काम सत्तादल के एक पदाधिकारी के स्वयं सहायता समूह को मिला था। काम कराए बिना ही भुगतान करा लिया गया। प्रकरणों के जानकारी में आते ही डीएम एमपी सिंह ने संडीला एसडीएम तान्या सिंह की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी।
समिति में जिला विकास अधिकारी व श्रम रोजगार उपायुक्त को नामित किया गया है। प्रारंभिक जांच में कार्यों पर न तो सीआईबी लगे मिले और न ही किन्हौटी में इंटरलॉकिंग लगी मिली है। एसडीएम ने बताया कि मंगलवार को समिति जांच के लिए गांवों में गई थी। यह काम ग्राम पंचायत की ओर से कराए गए हैं और समूह की ओर से सीआईबी लगवाए जाने थे। बरसात के कारण पूरी जांच नहीं हो सकी है। प्रारंभिक जांच की जानकारी डीएम को दे दी गई है।
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देख लीजिएगा, यह हमारे लोग हैं
जामू और किन्हौटी में काम के बिना ही भुगतान के मामले की जांच के लिए डीएम एमपी सिंह ने संडीला एसडीएम की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति का गठन कर दिया। समिति में नामित अधिकारियों के मोबाइलों पर पर अपनों को बचाने के लिए सत्तापक्ष की ओर से सिफारिशें शुरू हो गईं हैं। फोन करने वाले सत्ताधारी नेताओं का एक ही वाक्य होता है कि देख लीजिएगा, यह पार्टी के लोग हैं। चुनाव में मदद करते हैं।
बिना एमबी के कैसे बिल-वाउचर हो गए पास
मनरेगा मद सहित अन्य विकास व निर्माण कार्यों में व्यवस्था है कि कार्य होने की दशा में तकनीकी मापांकन होता है। मेजरमेंट बुक (एमबी) के बिना भुगतान की प्रक्रिया व्यवस्था अनुसार पूरी नहीं होनी चाहिए। जामू और किन्हौटी में सीआईबी लगे नहीं व किन्हौटी में इंटरलॉकिंग भी नहीं लगी तो सवाल उठता है कि एमबी किस कार्य की करा ली गई।