संवाद न्यूज एजेंसी
संडीला। सरकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर बच्चों के उपचार के लिए बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। ऐसे में अभिभावकों के बच्चों के उपचार के लिए निजी चिकित्सकों पर आश्रित होना पड़ रहा है, इससे आर्थिक दबाव भी पड़ता है। गंभीर बीमारी के उपचार के लिए लखनऊ का रास्ता पकड़ना पड़ता है।
तहसील स्तर पर स्थापित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बड़ी संख्या में आसपास के क्षेत्रों से लोग इलाज के लिए आते हैं। इनमें बच्चों की संख्या अधिक होती है लेकिन, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बाल रोग विशेषज्ञ बहुत दिनों से हैं ही नहीं। ऐसे में बाल रोग विशेषज्ञ के न होने के कारण लोगों बच्चों की जांच व उपचार के लिए भटकना पड़ता है। आखिर में मजबूर होकर माता-पिता बच्चों को लखनऊ या हरदोई जाकर निजी अस्पतालों में इलाज कराते हैं।
एक दशक पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अधीक्षक के पद पर बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज कुमार श्रीवास्तव की तैनाती की गई थी। कुछ दिन बाद ही उनका स्थानांतरण हो गया, तब से अभी तक किसी भी बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं की गई है। इससे आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
डॉ. मशूद आलम के जाने के बाद अब तक किसी सर्जन की भी तैनाती नहीं की गई है। इससे सामान्य ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। इससे छोटे से छोटे ऑपरेशन के लिए लोगों को प्राइवेट अस्पतालों की तरफ रुख करना पड़ रहा है। सीएचसी अधीक्षक डॉ. शरद वैश्य ने बताया कि सीएचसी मानक के अनुसार बाल रोग व सर्जन की तैनाती को छोड़कर बाकी सभी मानक पूरे हैं। सर्जन व बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती की विभाग से कई बार पत्र के माध्यम से मांग की जा चुकी है।