बेंहदर। ब्लॉक की ग्राम पंचायत अकबर पुर ताल्हु निवासी गीता पाल कभी एक-एक रुपये के लिए मोहताज हुआ करती थीं। उन्होंने बकरी पालन को अपनाया और आज इस व्यवसाय से आत्मनिर्भरता की इबारत लिख रही हैं। हर महीने चार से पांच हजार रुपये मुनाफा घर बैठे कमा रही हैं।
गीता पाल कहती हैं कि पहले बकरी पालन करना अटपटा लग रहा था। वर्ष 2020 मे सरस्वती महिला स्वयं सहायता समूह का गठन किया। इसमें एचसीएल के सहयोग से दो बकरी उन्हें भी मिलीं। इसके बाद बकरी पालन शुरू हो गया। दोनों बकरियों से आय बढ़ने लगी। अब उत्साह बढ़ा। बकरियों की संख्या में इजाफा हुआ। वर्तमान में उनके पास 30 बकरियां हैं।
वह गांव और क्षेत्र की महिलाओं के लिए मिसाल हैं। वह खुद स्वावलंबी होने के साथ अन्य महिलाओं को स्वरोजगार अपनाने की राह दिखा रही हैं।
पड़ोस की ग्राम पंचायत रसूल पुर बृह्म्नान गांव के माखन खेड़ा गांव निवासी उर्मिला ने कीर्ति आजीविका स्वयं सहायता समूह का गठन वर्ष 2021 में किया। गठन कर समूह से रुपये लेकर 10 बकरियां पाल रही हैं।
इसके अलावा इसी गांव की रहने वाली सुमिरता, कुसुमा, रामलली, रानी भी उजाला स्वयं सहायता समूह का गठन कर 18 बकरियां पाल रहीं हैं। घरों की महिलाएं बकरियां पालने में रुचि लेने लगी हैं।
कई बीमारियों में काम आ रहा बकरी का दूध
बकरी के दूध में कैल्शियम, प्रोटीन, पोटेशियम और विटामिन डी पाया जाता है, जो शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद है। यह दूध आयरन और कापर से भी समृद्ध है। हड्डी और दांतों को भी मजबूत बनाता है। बकरी का दूध अधिक लाभकारी डेंगू बुखार में है।
आत्मनिर्भरता की सीख दी
गीता पाल (45) का परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। पति सुखदेव खेती करते थे। ऐसे में जब घर की आर्थिक स्थिति नहीं सुधरी तो उन्होंने आत्मनिर्भर बनने की ठानी। गीता पाल बताती हैं कि दो वर्ष पूर्व उन्होंने बकरी पालन के कारोबार लिए एचसीएल समुदाय से प्रशिक्षण प्राप्त किया।
इसके बाद गांव की 10 महिलाओं के साथ मिलकर सरस्वती महिला स्वयं सहायता समूह का गठन किया। जिसमें निर्मला देवी अध्यक्ष और वह सचिव बनीं। उनकी मानें तो इस कारोबार से उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है।