फोटो-40- नदी में वोट से किसानों की तलाश करते एनडीआरएफ टीम सदस्य
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हरदोई। पांच नदियों वाले जिले की आबादी 45 लाख पार पहुंच रही है। धार्मिक मौकों पर लोग नदियों के तटों पर दान और स्नान करने के लिए जाते हैं। कई बार तो ऐसे अक्सर आते हैं जब हजारों की भीड़ के बीच दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। ऐसे अवसरों पर व्यवस्थाओं के नाम पर नदियों के तट चंद मछुआरों के सहारे हैं।
इमरजेंसी व्यवस्थाओं के रूप मेें जिले में न तो आपदा प्रबंधन एक्सपर्ट की टीम है न ही पीएसी की बाढ़ से बचाव कराने के लिए बनाई गई स्पेशल बटालियन। जब कभी किसी के नदी में डूबने की घटना होती है तो फिर आसपास के जिलों से मदद मांगनी पड़ती है।
पाली क्षेत्र में शनिवार को हुए हादसे ने एक बार फिर संसाधनों की उपलब्धता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हादसे के बाद बचाव दल एवं एक्सपर्ट टीम न होने की कमी शनिवार को कितनी खली, इसका अंदाजा ऐसे ही लगाया जा सकता है कि दोपहर करीब डेढ़ बजे हादसा हुआ और शाम साढ़े छह बजे एनडीआरएफ टीम बचाव कार्यों के लिए लखनऊ से आ सकी। यदि जिले में ही इस तरह की बचाव टीम, राहत कार्य संबंधी एक्सपर्ट टीमें होती तो बाहर से बुलाने एवं आने में इतना समय न लगता।
तैयारियां तो होती हैं पर इंतजाम नहीं हो पाते
हर वर्ष बाढ़ राहत को लेकर शासन एवं प्रशासन की ओर से तैयारियां कराई जाती हैं। इन तैयारियों में इमरजेंसी के लिए अलर्ट मोड को लेकर सेना तक बुलाने तक की व्यवस्था रहती है।
मगर सतर्कता के लिए यहां नियमित रूप से किसी विशेष दल एवं हर घाट तक मोटर वोट, स्पेशल गोताखोर आदि तक की व्यवस्था नहीं हो पा रही है।
फोटो-35- नदी से निकाला गया ट्रैक्टर- फोटो : HARDOI
फोटो-34- घटना स्थल पर पहुँचकर जानकारी लेती आईजी लक्ष्मी सिंह- फोटो : HARDOI