मृतका की मां ने बताया कि 13 सितंबर को पड़ोस के गांव के दो युवक उसकी बेटी को बहला-फुसलाकर गाजियाबाद ले गए थे। बेटी घर से 25 हजार रुपये और जेवर ले गई थी। 16 सितंबर को बेटी ने फोन कर गाजियाबाद में होने की जानकारी दी थी। 17 सितंबर को वह बेटी को घर लेकर आई थी। आरोप है कि युवक नकदी-जेवर लेने के बाद शादी का दबाव बना रहे थे।
19 सितंबर को उसने थाने में तहरीर दी थी, लेकिन पुलिस ने उसकी फरियाद नहीं सुनी। जिससे क्षुब्ध होकर बेटी ने फंदा लगाकर जान दे दी। इधर गांव में चर्चा है कि किशोरी को परिजन घर वापस लाने के बाद घर से बाहर नहीं निकलने दे रहे थे। उस पर कई तरह की पाबंदियां लगा दी थीं। ऐसे में उसने आत्महत्या कर ली या फिर किसी ने उसकी हत्या कर शव लटका दिया।
प्रभारी निरीक्षक दीपक शुक्ला ने बताया कि थाने में फरियाद न सुने जाने का आरोप निराधार है। पुलिस जब मौके पर पहुंची, तो किशोरी का शव नीचे रखा था। उसने आत्महत्या की या उसकी हत्या की गई। इन बिंदुओं पर गहनता से पड़ताल की जा रही है।