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Hardoi News: हरदोईः सहारा इंडिया, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी पीड़ितों को करें भुगतान

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हरदोई। उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने कैनाल रोड स्थित सहारा इंडिया बैंक और नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को तीन पीड़ितों की राशि भुगतान करने का आदेश दिया हैं। मामलों की सुनवाई कर उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष बाबू प्रसाद, सदस्य दिलशाद अली, सदस्य सुरभि अग्रवाल ने यह फैसला सुनाया।
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मोहल्ला आजाद नगर निवासी अरविंद दीक्षित ने उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया था। इसमें बताया कि सहारा इंडिया द्वारा संचालित योजना के तहत 30 नवंबर 2016 को 18 माह की अवधि के लिए एफडी के जरिये 10 हजार रुपये फिक्स किए थे। यह पैसा ब्याज सहित 30 मई 2018 को मिलना था। जब वह अपने रुपये लेने बैंक गए तो उनका ब्याज सहित रुपये का भुगतान नहीं किया गया।
वह कई बार कार्यालय के चक्कर लगाते रहे। भुगतान न होने पर आयोग में वाद दायर कर अपना धन ब्याज सहित एवं मानसिक व शारीरिक कष्ट के लिए 10 हजार रुपये की मांग की।
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इसकी सुनवाई करते हुए आयोग ने बैंक को आदेशित करते हुए कहा है कि पीड़ित को ब्याज सहित 11,630 रुपये 30 दिन के अंदर दिया जाए। मानसिक व आर्थिक कष्ट के लिए पांच हजार जुर्माना देने का आदेश दिया है। समय पर राशि न देने पर सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से देना होगा।
वहीं बघौली थाना क्षेत्र के ग्राम गड़ेउरा निवासी प्रभात कुमार गुप्ता ने आयोग में वाद दायर कर बताया कि उसने 30 नवंबर 2017 को एफडी के माध्यम से 30 हजार रुपये 18 माह के लिए जमा किए थे। इसमें 30 मई 2019 को 34,890 रुपये मिलने थे। अवधि पूरी होने पर जब वह बैंक गया तो प्रबंधक आजकल का बहाना बनाकर टालता रहे।
पीड़ित ने न्यायालय में वाद दायर कर ब्याज सहित पैसे की मांग की साथ ही शारीरिक व मानसिक क्षति पूर्ति के लिए 20 हजार रुपये एवं वकील व मुकदमे के लिए 10 हजार रुपये की मांग की।
इसकी सुनवाई करते हुए न्यायालय ने बैंक को निर्देशित किया है कि पीड़ित को 34,890 रुपये 45 दिन के अंदर दिए जाएं। समय पर रुपये न देने पर सात प्रतिशत का ब्याज देना होगा। इसके साथ ही शारीरिक व मानसिक क्षति के लिए पांच हजार रुपये व वकील मुकदमा खर्चा के लिए तीन हजार रुपये देने का आदेश दिया है।
इसी प्रकार कोतवाली देहात क्षेत्र के ग्राम बहर निवासी सुशीला ने आयोग में वाद दायर किया थआ। इसमें बताया कि उसने अपनी बोलेरो का बीमा नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड अस्पताल रोड हरदोई से कराया था।
उनकी गाड़ी चार अगस्त 2016 की रात घर के बाहर से चोरी हो गई थी। चोरी की सूचना उसने इंश्योरेंस कंपनी को दी थी। बीमा कंपनी के अधिकारियों ने कहा कि एफआईआर दर्ज कराओ और गाड़ी के सभी कागज कार्यालय में जमा करो। इसके बाद ही तुम्हें बीमा का लाभ मिल पाएगा।
उसने अधिकारियों के बताए अनुसार कागजात दिए लेकिन कोई भी कार्रवाई नहीं की गई, तब उसने न्यायालय में वाद दायर किया था। सुनवाई के बाद फैसले में आयोग ने पीड़ित को 3,15000 रुपये 15 दिन में देने के आदेश दिए हैं।
वहीं शारीरिक व मानसिक क्षति के लिए 10,000 व वकील व मुकदमा खर्च के लिए 5,000 रुपये देने का आदेश दिया है। समय अवधि के अंदर पैसा न देने पर सात प्रतिशत ब्याज की दर से रुपये चुकाने होंगे।
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