हरदोई। समाज कल्याण विभाग से संचालित छात्रावासों में फर्जीवाड़ा सामने आया है। चार छात्रावासों की मरम्मत के लिए एक-एक लाख रुपये दिए गए, लेकिन मरम्मत के नाम पर कुछ नहीं हुआ।
वहीं छात्रों के पंजीकरण में भी हेराफेरी मिली है। प्रतिवर्ष छात्रों के पंजीकरण का नवीनीकरण होना चाहिए, मगर यहां पर छात्रों के पंजीकरण संबंधित कोई दस्तावेज नहीं मिले। इसे लेकर सीडीओ आकांक्षा राना ने गहरी नाराजगी जताते हुए तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई है। इस कमेटी को पांच दिन में अपनी रिपोर्ट जिला प्रशासन को देनी है।
जिला प्रशासन को छात्रावासों में अव्यवस्था होने की लगातार शिकायतें मिल रही थी। इनकी हकीकत जानने के लिए मंगलवार को सीडीओ आकांक्षा राना ने जिला समाज कल्याण अधिकारी राजमती के साथ इन छात्रावासों का आकस्मिक निरीक्षण किया। इस दौरान छात्रावासों में व्यवस्थाएं बदहाल मिली।
छात्रावासों में कहीं दीवार पर प्लास्टर उखड़ा मिला तो कहीं कमरों में फर्श टूटी थी। यहीं नहीं छात्रावासों के शौचालयों में गंदगी का अंबार लगा मिला। छात्रावासों की जीर्ण शीर्ण हालत देख सीडीओ ने गहरी नाराजगी जताई। वहां मौजूद कर्मचारियों को फटकार लगाई। इस पर जिला समाज कल्याण अधिकारी ने बताया कि बीते साल सभी छात्रावासों की मरम्मत कराने के लिए एक-एक लाख रुपये दिए गए थे।
यह पैसा खर्च कर दिया गया, लेकिन कोई काम नहीं कराया गया। जिसके चलते छात्रावास बदहाल हैं। वहीं सीडीओ ने छात्रों के पंजीकरण और नवीनीकरण की जानकारी मांगी तो छात्रावासों में दस्तावेज नहीं मिले।
दस्तावेजों में अंकित छात्रों की संख्या के मुताबिक मौजूदा समय में छात्रों की संख्या काफी कम रही। इस पर हैरानी जताती हुए सीडीओ ने टीम बनाकर जांच के आदेश दिए हैं। जांच टीम को पांच दिन में रिपोर्ट देनी है।
इन छात्रावासों का किया निरीक्षण
जिले के मन्नापुरवा में स्थित बाबू जगजीवन राम बालिका छात्रावास, राजकीय अनुसूचित जाति बालिका छात्रावास, राजकीय अनुसूचित जाति बालक छात्रावास, राजकीय अनुसूचित जाति बालक छात्रावास, राजकीय इंटर कॉलेज परिसर स्थित छात्रावास का निरीक्षण किया।
इन बिंदुओं पर होगी जांच
- कमरों में जालियां क्यों नहीं लगी।
- कमरों की खिड़कियों के शीशे क्यों टूटे।
- छात्रावासों में टूूटा फर्नीचर कहां से आया।
- शौचालय, बाथरूम एवं उनसे लगे हुए कमरों में सीलन क्यों।
- साफ-सफाई की स्थिति संतोषजनक नहीं पायी गई।
- प्रतिवर्ष छात्रों का रिन्यूवल क्यों नहीं कराया गया है।
- छात्रों के प्रवेश के दस्तावेज क्यों नहीं बनाए गए।
- छात्र-छात्राओं के वाहन खड़े करने के लिए शेड आदि की व्यवस्था क्यों नहीं है।
गठित की गई जांच समिति
- जिला सहायक निबंधक, सहकारी समितियां।
- सहायक अभियंता, डीआरडीए।
- जिला दिव्यांग कल्याण अधिकारी।