हरदोई। खेतों की जोताई में बढ़ते डीजल के दामों ने महंगाई ला दी है। ऐसे में लघु जोत और भूमिहीन किसान एक बार फिर से बैलों की जोड़ी बनाने लगा है। मशीनों के दौर में बिछड़ चुकी बैलों की जोड़ी को लेकर गांवों में अब एक बार फिर प्रयास शुरू हो रहे हैं।
सवाजयपुर तहसील क्षेत्र के कई गांवों में बैलों की जोड़ी के साथ हल से खेत जोतने के दृश्य दिखे हैं। किसानों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में डीजल के बढ़े दामों से खेतों की जोताई काफी महंगी हो चुकी है।
इसके कारण दो एकड़ से कम और भूमिहीन किसानों के लिए जीवन यापन करना कठिन हो गया है। कुछ साल पहले तक खरीफ के सीजन में एक एकड़ खेत की ट्रैक्टर से जोताई कराने में करीब 300 रुपये का खर्च आता था, जो कि अब 1200 हो गया है।
इसी तरह से गेहूं के सीजन में फसल की खंदाई कराने में एक एकड़ का खर्च एक हजार के आसपास रहता था जो अब तीन हजार पहुंच गया है। इस बार बारिश काफी कम होने के चलते किसानों को फसलों की बोआई करने के लिए खेतों को पानी लगाना पड़ा है।
एक एकड़ खेत में पानी लगाने पर पहले जो खर्च 500 के आसपास था। वह अब 1600 पहुंच गया है। ऐसे में किसानों के लिए खेती किसानी में कई तरह की समस्याएं हैं। गरीब और लघु किसान दो वक्त की रोटी जुटाने के लिए परंपरागत रूप से होने वाली खेती की ओर लौट रहा हैं।
पशुओं के चारे पर मशीनी संकट
बैलों को चारा पानी देना घाटे का सौदा मान चुके किसानों के मशीन मोह ने चारा की समस्या खड़ी कर दी। इसके चलते कभी गांवों की गलियों में दिखने वाला भूसा इस बार 1500 रुपये क्विंटल के भाव में बिका।
इससे किसानों के लिए दुधारू मवेशियों के लिए चारे की समस्या रही है। किसानों ने बताया कि पहले बैलों से गहाई कराके गेहूं की फसल का भूसा बनाते थे। इसके बाद में थ्रेसरिंग शुरू हुई। इसके बाद कंपाइन से खंदाई के मोह में भूसा निकलना कम हो गया, जिससे यह समस्या उत्पन्न हो गई।
बोले किसान, बैल हमारी शान
किसान रामहेत, राम सुहास, राम निवास, विश्वा ने बताया कि बैल किसानों की पहचान ही नहीं शान हैं। मशीनी युग में बैलों की उपयोगिता कम हो गई है। इससे अब काफी कम संख्या में किसान बैलों को पालते हैं।
मैकपुर गांव के किसान भगवानदीन ने बताया कि उसके पास एक एकड़ से कम भूमि है। ट्रैक्टर से जोताई कराते तो एक घंटे में हो जाती और 1200 रुपये का खर्च आता। बैलों से जोताई करने में पूरा दिन लग जाता है, दोनों बैल अलग-अलग हैं, लेकिन इनकी जोड़ी चल रही है।