बिजली अभियंताओं से कहा कि सिर्फ कार्रवाई न करें, बिजली व्यवस्था के सुधार पर भी ध्यान दें। लोगों के खिलाफ बिजली चोरी का मुकदमा दर्ज कराना ही पर्याप्त नहीं, ऐसा प्रयास करें कि अधिकतर लोग कनेक्शन लें। किसी भी उपभोक्ता का उत्पीड़न न होने पाए।
शाम करीब पौने चार बजे बैठक शुरू हुई। इसमें सभी विभागों के अधिकारी शामिल थे। शुरूआत में डीसी मनरेगा ने विकास कार्यों की बुकलेट से उपलब्धियां पढ़कर सुनाईं तो उप मुख्यमंत्री ने उन्हें रोका और कहा कि वह खुद अधिकारियों से बात करेंगे। इसके बाद जल जीवन मिशन की समीक्षा की।
उप मुख्यमंत्री ने पहले से संचालित पेयजल योजनाओं का हाल विधायकों से पूछा। इसके बाद जल जीवन मिशन में कितने गांव चयनित हुए। कितने गांवों में पेयजल योजना के संचालन के लिए जमीन मिली? अधिकारियों से पूछा। डीएम ने बताया कि 800 गांवों में जमीन मिल गई है।
जहां नई पेयजल योजनाएं संचालित हैं, वहां पर कनेक्शन कम क्यों हुए? यह सवाल पूछा तो अधिकारियों ने अपना बचाव करते हुए कार्यदायी संस्था पर दोष मढ़ दिया। अधिकारियों का कहना था कि प्लंबर को कनेक्शन के बदले मजदूरी कम दी जा रही है। इसलिए वे नए कनेक्शन नहीं कर रहे हैं। उन्होंने डीएम से कहा कि मानदेय बढ़वाने के लिए कार्यदायी संस्था से बात करें।