फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हरदोईः रोकर बोलीं शहीद की मां, बेटे को चपरासी ही बना लो

विज्ञापन
फोटो-11- रोते हुए अपनी परेशानी बतातीं शहीद की मां नत्थन बेगम - फोटो : HARDOI
विज्ञापन
पाली। कारगिल दिवस की पूर्वसंध्या पर युद्ध में शहीद हुए लांस नायक आबिद खां के घर की हालत चिराग तले अंधेरा वाली दिखी। मंगलवार को देश कारगिल युद्ध के जांबाजों को उनके साहस और कुर्बानी के लिए याद करेगा।
विज्ञापन

वहीं, जिले के शहीद के घर की हालत को देखने वाला कोई नहीं है। देश के लिए जान गंवाकर आबिद ने पूरे जिले का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया था, लेकिन प्रशासन उनकी शहादत पर किए वादे को भुला बैठा है।
उनकी मां नत्थन बेगम आर्थिक तंगी में जीवन बसर कर रही हैं। हालचाल के बारे में पूछते ही नत्थन फफककर रो पड़ीं। शहीद की मां ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के खिलाफ जमकर गुबार निकाला।
विज्ञापन

कहा कि बूढ़ी हड्डियों में घर चलाने की ताकत नहीं बची। डीएम मुझसे मिलने आए थे, मेरे बेटे को नौकरी दिलाने का वादा किया था। अब मुझे डीएम से मिलना है, बेटा 12वीं पास है, उसे चपरासी की ही नौकरी पर रख लें।
कस्बे के मोहल्ला काजी सराय निवासी स्व. गफ्फार खान के बेटे आबिद 1 जुलाई 1999 में कारगिल युद्ध में शहीद हो गए थे। 12 जुलाई 1999 को शहीद का शव नगर आने पर अंतिम दर्शन के लिए लोग जुटे थे।
मोहल्ले का नाम आबिद नगर और बरगद तिराहे से घर तक जाने वाली सड़क को शहीद आबिद मार्ग घोषित कर दिया गया। नगर पंचायत की ओर से बरगद तिराहे के पास शहीद के नाम के दो बोर्ड लगाए गए थे। आज दोनों बोर्ड गायब हैं। शहीद की मजार के पास गंदगी पड़ी है। शहीद के घर तक जाने वाली सड़क बदहाल है।
आबिद के छोटे भाई नासिर ने बताया कि नगर पंचायत ने मजार के बाहर इंटरलॉकिंग टाइल्स बिछाने की बात कही थी। बजट भी पास हुआ था, अभी तक इंटरलॉकिंग नहीं लगी। बारिश के दौरान मजार के बाहर खाली पड़ी जमीन पर कीचड़ होता है। हर बार कारगिल दिवस पर भीड़ जुटती है, फिर पूरे साल के लिए शहीद को भुला दिया जाता है।
जिसने की सीमा की सुरक्षा, उसकी जमीन कब्जा
शहीद की मां ने बताया उनकी करीब तीन बीघा जमीन पर एक स्कूल का कब्जा है। सरकार ने जो वादे किए वह तो पूरे नहीं हुए, कम से कम नापजोख कर जमीन ही कब्जा मुक्त करा दें। उन्होंने बताया वह आज भी जमीन का लगान जमा कर रही हैं।
मजार के अंदर सूखा पड़ा नल
शहीद की कब्र के पास सरकारी नल लगवाया गया था। समय के साथ वह नल खराब हो गया। सोमवार को नगर पंचायत की ओर से नल को सड़क से ऊपर उठा दिया गया लेकिन इससे अब पानी नहीं निकलता। जिम्मेदारों ने नल की मरम्मत करने की जहमत तक नहीं उठाई।
शहीद की कब्र तो है प्रतिमा नहीं
नगर में बरगद तिराहे के पास शहीद की कब्र तो बनी है, लेकिन नगर में कहीं भी उनकी प्रतिमा स्थापित नहीं की गई। 1999 में तत्कालीन डीएम बीपी सिंह ने कब्र पर प्रतिमा स्थापित कर हर वर्ष कारगिल दिवस पर मेला लगवाने की बात कही थी, लेकिन न प्रतिमा लगी न मेला।
पिछली बार न कोई नेता पहुंचा न अधिकारी
शहीद के भाई नासिर ने बताया कि कारगिल दिवस पर स्थानीय लोग ही पहुंचते हैं, डीएम तो कभी आए नहीं। 10 साल पहले एसडीएम आए थे। उसके बाद वह भी नहीं आए। सवायजपुर विधायक सिर्फ एक बार आए थे। पिछली बार कारगिल दिवस पर न कोई नेता आया न ही अधिकारी।
दिवस के एक दिन पहले ही होती सफाई
शहीद की कब्र पूरे साल उपेक्षा का शिकार रहती है। कब्र के पास झाड़ियां उगी हुई हैं, उसकी सुध लेने वाला कोई नहीं। शहीद की पत्नी फिरदौस ने बताया कि 23 वर्ष हो गए शहादत को। जिम्मेदारों को सिर्फ कारगिल दिवस पर ही कब्र की याद आती है। आनन-फानन साफ-सफाई कर सिर्फ खानापूर्ति की जाती है।

फोटो-12- मजार की बाउण्ड्री का रंग-रोगन करता श्रमिक- फोटो : HARDOI

फोटो-10- शहीद आबिद खां फाइल फोटो- फोटो : HARDOI

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें