हरदोई। जिले में सहकारी समितियों के तहत मिनी बैंक खोले गए थे। इनमें सदस्य किसानों और उनके परिजनों के खाते खोलकर रुपये जमा कराए गए। अब खाताधारक अपने भुगतान के लिए भटक रहे हैं। मिनी बैंक बंद हो गए हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं।
सरेहरी, पुरवावां, लोनार, पलिया, उमरा ब्योरापुर, आदमपुर समितियों के अधीन 1989 में मिनी बैंक खोले गए थे। सरकार की मंशा थी कि किसानों को उनके ही गांव में बैंकिंग सेवाएं मिल सकें।
समिति के सचिव और लेखाकार को मिनी बैंक संचालित करने की जिम्मेदारी दी गई थी। समिति कर्मियों के आग्रह पर किसानों ने खाते खोले थे। वर्ष 2012 तक मिनी बैंकों में रुपये जमा होते और आसानी से मिलता रहा।
जब जिला सहकारी बैंक की माली हालत खस्ता हुई, तो लेनदेन प्रभावित होने लगे और मिनी बैंक धीरे-धीरे निष्क्रिय हो गए। इनमें खाताधारकों का भुगतान फंस गया। कई खाताधारक तो भुगतान के इंतजार में भागदौड़ करने के बाद थक गए।
खाताधारकों की बात
मेरे परिवार के तीन खाते मिनी बैंक में हैं। मैं कई बार जमा रुपये वापस लेने के लिए पहुंचा तब मुझे बताया गया कि जिला सहकारी बैंक जाएं। पहले वहां खाता खुलेगा। उसके बाद रुपये वापस मिलेंगे। मैं जिला मुख्यालय जाकर खाता खुलवाने की अब भागदौड़ नहीं करना चाहता।
- राकेश कुमार, गोसवा
पुरवावा सहकारी समिति के अधीन मिनी बैंक भी संचालित था। जो अब बंद है। मेरी तरह कई और खाताधारक जमा धन पाने के लिए भटक रहे हैं। अब सवाल यह है कि वर्षों बीत गए रुपये वापस नहीं मिले। अधिकारी बताएं कि कितना और इंतजार करना पड़ेगा।
- राम आसरे, गोसवा
--------------
जिम्मेदारों की बात
अतीत में जिला सहकारी बैंक की हालत ठीक नहीं थी लेकिन अब बदलाव हुआ है। सभी को भुगतान मिलेंगे। अगर मिनी बैंक के किसी खाताधारक को भुगतान नहीं मिल रहा है, तो वह जिला सहकारी बैंक में शिकायत दर्ज कराए। भुगतान दिलाया जाएगा। - आशीष कुमार, सचिव, जिला सहकारी बैंक
-----------
ताजा स्थिति जानने के लिए मांगी जानकारी
जिला सहकारी बैंक से जुड़ी कितनी सहकारी समितियों के अधीन मिनी बैंक संचालित थे। इसकी जानकारी सचिव नहीं दे सके। उन्होंने यह जरूर कहा कि वह पत्र जारी करके बैंक शाखाओं के सभी प्रबंधकों से कहेंगे कि अपने क्षेत्र के मिनी बैंक की ताजा स्थिति से अवगत कराएं ताकि समस्याओं का समाधान किया जा सके।