बघौली। बर्रा डाल सिंह-अहिरोरी मार्ग पर सईं नदी पर युवाओं ने एक बार फिर से अपनी मेहनत और पैसा लगाकर उम्मीदों का कच्चा पुल फिर से बनाया है। इसके बन जाने के बाद 50 गांवों के लोगों को फिर से लाभ मिल रहा है। उन्हें आवागमन में अब सात किलोमीटर दूरी का चक्कर नहीं लगाना पड़ रहा है।
अहिरोरी ब्लॉक के बर्रा डाल सिंह-अहिरोरी मार्ग पर सईं नदी है। इस पर पुल नहीं है। बरसात में नदी उफान पर आ जाती हैं तो बर्रा गांव के लोग नाव से नदी पार करते हैं।
मई 2020 में लॉकडाउन के दौरान ग्राम पंचायत करीमनगर सैदापुर के मजरा मसीत व बर्रा गांव के कुछ ग्रामीणों ने अपने स्तर से ह्यूम पाइपों को डालकर जैसे-तैसे इस मार्ग पर कच्चा पुल बना लिया।
इसके बनने से आवागमन आसान हो गया था लेकिन बारिश के दिनों में इस अस्थायी पुल का एक हिस्सा बह गया। इसके चलते करीमनगर, सैदापुर मसीत, चैनखेड़ा, काईमऊ, रामनगरिया, बल्लीपुर, केशवन अहेरी समेत 50 गांवों के लोगों को फिर से दिक्कत होने लगी।
बर्रा गांव के राजकुमार तथा काशी ने दोबारा बांस बल्ली लगाकर बोरियों में मिट्टी और बालू भरकर आवागमन के लिए दोबारा पुल बनाकर रास्ता चालू किया है।
चंदा करके बनाया था 18 मीटर लंबा पुल
लॉकडाउन के दौरान चंदा करके ग्रामीणों ने 18 मीटर लंबा पुल बनाया था। इसमें 4000 बोरियां मिट्टी लगीं थीं। ह्यूम पाइप और बांस बल्ली का इस्तेमाल किया गया था। पुराना सामान काम आया लेकिन बांस बल्ली जो बह गईं थीं।
उन्हें खरीद कर लगाने में एक बार फिर रुपये ग्रामीणों को खर्च करने पड़े। अस्थायी पुल दोबारा बनने से ग्रामीण उत्साहित हैं और सरकार से स्थायी पुल की मांग कर रहे हैं।
वहीं लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता इस मामले में नियमों की अड़चन बताकर पुल बनाए जाने से इन्कार कर चुके हैं। विभाग की ओर से बताया गया है कि किसी नदी के अप स्ट्रीम और डाउन स्ट्रीम में 10 किलोमीटर के दायरे में दूसरे पुल का निर्माण नहीं कराया जा सकता है। जहां पर पुल की मांग की जा रही है। वहां से तीन किलोमीटर की दूरी पर एक पुल पहले से बना हुआ है।